कटिहार के प्राणपुर में जीविका दीदियों के ‘सिलाई घर’ का निरीक्षण, अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने सराहा महिलाओं का प्रयास

कटिहार। बिहार में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित जीविका परियोजना के तहत विभिन्न जिलों में कई नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार 12 मार्च 2026 को जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड में संचालित जीविका दीदियों के सिलाई घर का भ्रमण और निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां कार्यरत जीविका दीदियों से संवाद किया और उनके कार्यों की सराहना करते हुए इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने सिलाई घर में चल रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने देखा कि किस प्रकार जीविका से जुड़ी महिलाएं सामूहिक रूप से सिलाई कार्य कर रही हैं और अपने हुनर के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, बल्कि समाज में अपनी एक नई पहचान भी बना रही हैं। उन्होंने जीविका दीदियों से बातचीत कर उनके अनुभव, प्रशिक्षण और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने कहा कि जीविका परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करना है। उन्होंने कहा कि जीविका के माध्यम से लाखों महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। प्राणपुर प्रखंड में संचालित यह सिलाई घर भी इसी दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड की लगभग 30 से 35 प्रशिक्षित जीविका दीदियां सामूहिक रूप से सिलाई कार्य करेंगी। ये महिलाएं आंगनवाड़ी केंद्रों में पढ़ाई कर रहे बच्चों के लिए कपड़ों की सिलाई का कार्य करेंगी। इस व्यवस्था से जहां एक ओर स्थानीय स्तर पर बच्चों के लिए आवश्यक कपड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर जीविका से जुड़ी महिलाओं को स्थायी आय का एक स्रोत भी मिलेगा।
अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जीविका समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण, संसाधन और बाजार से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिलाई घर जैसी पहल से महिलाओं को अपने गांव या प्रखंड स्तर पर ही रोजगार मिल सकेगा, जिससे उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने सिलाई मशीनों की उपलब्धता, कार्यस्थल की व्यवस्था, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और उत्पादन की प्रक्रिया का भी जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सिलाई घर को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि यहां कार्यरत महिलाओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस दौरान जीविका दीदियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जीविका से जुड़ने के बाद उनके जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं। पहले जहां वे घर के कामकाज तक ही सीमित थीं, वहीं अब वे आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें अब रोजगार का अवसर मिला है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।
महिलाओं ने बताया कि सामूहिक रूप से कार्य करने से उन्हें न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि आपसी सहयोग और आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जीविका परियोजना के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन मिल रहे हैं, जिससे वे अपने हुनर को बेहतर तरीके से विकसित कर पा रही हैं।
श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने जीविका दीदियों के उत्साह और मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं की यह ऊर्जा और आत्मविश्वास ही बिहार के विकास की नई ताकत है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे समाज और अर्थव्यवस्था दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जीविका समूहों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए और महिलाओं को विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ा जाए। इसके साथ ही उत्पादों के विपणन की व्यवस्था भी बेहतर बनाने पर जोर दिया गया, ताकि महिलाओं को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके।
जीविका परियोजना के तहत बिहार के विभिन्न जिलों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं बचत, ऋण और विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार कार्यों में भाग ले रही हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
प्राणपुर प्रखंड में संचालित सिलाई घर भी इसी पहल का हिस्सा है, जहां प्रशिक्षित जीविका दीदियां सामूहिक रूप से कार्य कर रही हैं। यह मॉडल आने वाले समय में अन्य प्रखंडों और जिलों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
इस निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान जीविका और ग्रामीण विकास विभाग के कई अधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को परियोजना से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी और आगे की योजनाओं के बारे में भी अवगत कराया।
जिला प्रशासन और जीविका विभाग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि इस पहल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही महिलाओं को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
कुल मिलाकर प्राणपुर प्रखंड में संचालित यह सिलाई घर न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह ग्रामीण विकास और सामुदायिक सशक्तिकरण का भी एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और समाज के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।
