प्रमुख खबर
- मनरेगा कार्यों में अनियमितता का आरोप, मजदूरों की जगह दूसरे लोगों से काम कराने का सवाल
- श्रावणी मेला में कांवरियों के लिए पेयजल, शौचालय और स्वच्छता की विशेष व्यवस्था
- ट्रेन के बैटरी बॉक्स में छिपाकर रखी देसी-विदेशी शराब बरामद, पांच बोरे जब्त
- नवगछिया में मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, चार हथियार तस्कर गिरफ्तार
- सुल्तानगंज श्रावणी मेला क्षेत्र का सिटी एसपी ने किया निरीक्षण, सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन के दिए निर्देश
स्वास्थ
-
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बड़ा हादसा जदयू सांसद अजय मंडल घायल
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बड़ा हादसा जदयू सांसद अजय मंडल घायल

रिपोर्ट –शयामानंद सिह भागलपुर
भागलपुर में उस समय अपरा -तफरी मच गई, जब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भागलपुर के जदयू सांसद अचानक लड़खड़ाकर गिर गए दरअसल आज एक दिवसीय दौरे पर भागलपुर के इंदौर स्टेडियम में चल रहे बैडमिंटन टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहुंचे थे उसे कार्यक्रम में सांसद अजय मंडल भी मुख्यमंत्री के साथ चल रहे थे, इसी दौरान इंदौर स्टेडियम में सांसद अजय मंडल अचानक लड़खड़ा कर निचे गिर पड़े इसके बाद वह मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने उन्हें संभाला और उठाकर बगल में पड़े सोफे पर बिठाया फिर एंबुलेंस को बुलाकर वहां से जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल इलाज के लिए भेज दिया। जहाँ कमर और पैर का एक्स-रे किया गया । इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती किया गया है। एक्स-रे रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है बताया जा रहा है कि कमर और पैर में गंभीर चोट लगी है। फिलहाल संसद की हालत स्थिर बताई जा रही है, घटना की सूचना मिलने पर सैकड़ो की संख्या में कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचकर संसद का हाल-चाल जाना है, वहीं जिलाधिकारी और एसएसपी ने भी घटना के बारे में जानकारी ली है
खबर
-
मनरेगा कार्यों में अनियमितता का आरोप, मजदूरों की जगह दूसरे लोगों से काम कराने का सवाल
मनरेगा कार्यों में अनियमितता का आरोप, मजदूरों की जगह दूसरे लोगों से काम कराने का सवाल

जगदीशपुर। जगदीशपुर प्रखंड की करीब नौ पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत खुदाई, सुरक्षा बांध निर्माण, मिट्टी भराई,डार की खुदाई समेत कई तरह के कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा के कार्यों में पारदर्शिता बरतने के लिए जॉब कार्डधारी मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और मस्टर रोल का सही तरीके से सत्यापन जरूरी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन मजदूरों के नाम पर मनरेगा में जॉब कार्ड दर्ज हैं, उनमें से कई वास्तविक मजदूर कार्यस्थल पर काम नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि उनके स्थान पर दूसरे लोगों से काम कराया जा रहा है और बाद में जॉब कार्डधारी मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच कराने की मांग की है।
मस्टर रोल और मजदूरों की उपस्थिति की जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मनरेगा के उद्देश्य के विपरीत होगा। मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है। ऐसे में किसी दूसरे व्यक्ति से काम कराने और जॉब कार्डधारी के नाम पर उपस्थिति दर्ज करने की शिकायत गंभीर मामला हो सकता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी संबंधित पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यों की स्थल पर जांच कराई जाए। जांच के दौरान कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों की पहचान, जॉब कार्ड, मस्टर रोल और मजदूरी भुगतान का मिलान कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
रोजगार सेवक और कनीय अभियंता की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों की निगरानी करने वाले संबंधित रोजगार सेवक और कनीय अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कार्यस्थलों की निगरानी और मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों ने कहा कि मनरेगा कार्यों की जमीनी हकीकत सरकारी रिकॉर्ड से अलग होने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने इसे व्यवस्था में नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप बताते हुए जांच की मांग की।
पंचायतवार जांच कराने की मांग
ग्रामीणों ने प्रखंड प्रशासन और संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से पंचायतवार मनरेगा कार्यों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही कार्यस्थल पर मजदूरों की वास्तविक संख्या, मस्टर रोल में दर्ज उपस्थिति, जॉब कार्ड और मजदूरी भुगतान का मिलान कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मनरेगा कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं। प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
