कटिहार में शराबबंदी का असर बेअसर

बथना कोल्ड स्टोर रोड पर नशे में युवक बेहोश, स्थानीय लोगों में आक्रोश
कटिहार।
बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के बावजूद कटिहार जिले में इसका असर जमीन पर कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। ताजा मामला शहर के बथना कोल्ड स्टोर रोड का है, जहां आज सुबह सड़क किनारे शराब के नशे में बेहोश हालत में एक युवक पड़ा हुआ मिला। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि शराबबंदी की हकीकत को भी उजागर करता है।
सुबह टहलने और काम पर जाने निकले लोगों की नजर जब सड़क किनारे गिरे युवक पर पड़ी तो इलाके में अफरा-तफरी मच गई। युवक नशे में इतना धुत था कि उसे आसपास की किसी भी गतिविधि का होश नहीं था। कुछ लोगों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह खुद को संभाल पाने की स्थिति में नहीं था।
आए दिन शराबियों का जमावड़ा
स्थानीय लोगों का कहना है कि बथना कोल्ड स्टोर रोड और आसपास के इलाकों में यह कोई पहली घटना नहीं है। यहां आए दिन शराब के नशे में धुत लोग झूमते, गाते, हंगामा करते और कभी-कभी सड़क पर गिरते हुए देखे जाते हैं। दिन हो या रात, शराबियों का आना-जाना लगातार बना रहता है।
स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों के अनुसार, शराबबंदी के बावजूद इस इलाके में शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है। यही कारण है कि नशे में धुत लोग खुलेआम सड़कों पर उत्पात मचाते नजर आते हैं। इससे न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।
राहगीरों और छात्रों को हो रही परेशानी
इलाके के लोगों ने बताया कि शराबियों की वजह से शरीफ और सामान्य लोगों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। खासकर महिलाएं, बुजुर्ग और छात्र-छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। आसपास कई स्कूल और कोचिंग संस्थान हैं, जहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर इस माहौल का नकारात्मक असर पड़ रहा है।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय डर बना रहता है कि कहीं नशे में धुत कोई व्यक्ति उनसे बदसलूकी न कर दे या कोई अप्रिय घटना न घट जाए। शराबियों की हरकतों से सामाजिक माहौल खराब हो रहा है और इलाके की छवि भी धूमिल हो रही है।
शराबबंदी पर उठ रहे सवाल
बिहार सरकार ने समाज को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से शराबबंदी लागू की थी, लेकिन कटिहार जैसे इलाकों में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब की अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। चोरी-छिपे शराब की तस्करी और बिक्री जारी है, जिसका सीधा असर सड़क और सार्वजनिक स्थलों पर देखने को मिल रहा है।
लोगों का मानना है कि जब तक अवैध शराब के कारोबार पर सख्ती से कार्रवाई नहीं होगी और नियमित गश्ती नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक शराबबंदी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने कहा कि वे इस मामले की शिकायत जल्द ही मुखिया और मनिहारी थाना (या संबंधित थाना) में जाकर करेंगे। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में कोई बड़ी घटना भी घट सकती है।
स्थानीय समाजसेवियों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में नियमित पुलिस गश्ती बढ़ाई जाए, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाए और अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, शराबियों के इलाज और पुनर्वास की दिशा में भी पहल करने की जरूरत है।
सामाजिक माहौल हो रहा प्रभावित
इलाके के बुजुर्गों का कहना है कि पहले यह इलाका शांत माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय से शराबियों की गतिविधियों के कारण माहौल बिगड़ता जा रहा है। देर रात तक शोर-शराबा, गाली-गलौज और सड़क पर हंगामा आम बात हो गई है। इससे आम लोगों की नींद और दिनचर्या दोनों प्रभावित हो रही हैं।
जनता की चेतावनी
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे। उनका कहना है कि शराबबंदी का सही मतलब तभी है जब सड़कों और मोहल्लों में इसका असर दिखाई दे। केवल कानून बनाना काफी नहीं, उसका सख्ती से पालन भी जरूरी है।
नशामुक्त समाज की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी को सफल बनाने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। नशे के दुष्परिणामों के बारे में लोगों को समझाना और युवाओं को सही दिशा देना समय की मांग है।
कटिहार के बथना कोल्ड स्टोर रोड की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या शराबबंदी अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल हो पाई है? जब तक ऐसे दृश्य सड़कों पर दिखाई देते रहेंगे, तब तक इस कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहेंगे।
