करोड़ों की लागत, फिर भी नहीं बह रहा पानी

बाराहाट के चंगेरी-मिर्जापुर में नल-जल योजना फेल, तीन हजार लोगों पर पीने के पानी का संकट ऑपरेटर 10–15 दिनों से गायब, विभाग भी बेबस

रिपोर्ट : ऋषभ गुप्ता, बाराहाट

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना बाराहाट प्रखंड के मिर्जापुर पंचायत में हवा-हवाई साबित हो रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर योजना का ढांचा खड़ा जरूर हो गया, लेकिन नल में पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंच रही। चंगेरी और मिर्जापुर गांव के हजारों ग्रामीण बीते महीनों से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।

चंगेरी में 5 साल से बिछी पाइपलाइन, फिर भी नलों में सूखा

चंगेरी गांव के वार्ड संख्या 2, 3 और 4 में पांच साल पहले पाइपलाइन डाल दी गई थी। लेकिन ग्रामीण बताते हैं कि—

“आज तक नल में पानी नहीं आया। शिकायतें करते-करते थक गए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि कहीं पाइपलाइन लीक है, कहीं दबाव नहीं बन पा रहा, और अधिकांश जगहों पर लाइन टूटकर जमीन में ही पानी रिस रहा है।

 

मिर्जापुर में तीन महीने से टंकी बंद, लोगों की मजबूरी बढ़ी

मिर्जापुर गांव के वार्ड 5 और 6 में पिछले तीन महीनों से जलापूर्ति ठप है। लोग अब हैंडपंप, निजी बोरिंग और खरीदे हुए पानी पर निर्भर हैं। लगभग तीन हजार ग्रामीण पीने के साफ पानी के संकट का सामना कर रहे हैं।

ग्रामीण रामदयाल बिंद, बबलू मंडल, कृष्ण देव बिंद आदि ने बताया—

“पहले एक टंकी से दोनों गांवों में पानी मिलता था, अब सिर्फ मिर्जापुर नाम भर में है, वो भी बंद पड़ा है।”

ग्रामीणों का आरोप—‘नल-जल बस कागजों में चल रहा है’

ग्रामीणों में नाराज़गी साफ दिख रही है। उनका कहना है कि योजना की शुरुआत के बाद कुछ समय पानी आया, लेकिन जल्द ही स्थिति बिगड़ गई। ग्रामीण राजेंद्र यादव और मिथिलेश कापरी कहते हैं—

“अगर इतनी बड़ी रकम खर्च करने की जगह हर टोले में कुछ चापाकल लगा दिया जाता तो आज यह हाल नहीं होता। सात निश्चय की योजना यहां पूरी तरह फेल हो चुकी है।”

ऑपरेटर लापता, विभाग के हाथ खड़े

कनीय अभियंता ने स्वीकार किया है कि योजना संचालन के लिए नियुक्त ऑपरेटर 10–15 दिनों से बिना सूचना गायब है।

उन्होंने बताया—

“मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है और समाधान पर विचार हो रहा है।”

यह बयान व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है कि एक ऑपरेटर के गायब होने से पूरी योजना पंगु हो गई है।

 

ग्रामीणों की मांग—जांच हो और तुरंत शुरू हो पानी

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पीएचईडी से निम्न मांगें रखी हैं—

  • गांव में सर्वे कर वास्तविक समस्या की पहचान की जाए
  • टूटी पाइपलाइन, मोटर, बोरिंग और लीक की समस्या तत्काल सुधारी जाए
  • जिम्मेदार ऑपरेटर के स्थान पर नया प्रशिक्षित ऑपरेटर नियुक्त किया जाए

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे

निष्कर्ष

सरकार की करोड़ों की योजना कागजों और बोर्डों तक सीमित है। हकीकत में लोगों के नलों में सूखा है और उम्मीद भी कम होती जा रही है। जब तक विभाग जवाबदेह और सक्रिय नहीं होगा, तब तक हर घर नल-जल योजना सिर्फ स्लोगन बनकर रह जाएगी।

 

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