गंगा स्वच्छता पखवाड़ा एवं जल महोत्सव 2026 का शुभारंभ, जल संरक्षण और स्वच्छता पर जोर

कटिहार/संवाददाता। जिले में गंगा नदी की स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल के तहत जिला गंगा समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को समाहरणालय परिसर में “गंगा स्वच्छता पखवाड़ा एवं जल महोत्सव 2026” का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त श्री अमित कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ बनाए रखने के साथ-साथ आमजन में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद उपस्थित अधिकारियों ने गंगा की स्वच्छता को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उप विकास आयुक्त श्री अमित कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। इसकी स्वच्छता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि “गंगा स्वच्छता पखवाड़ा” के दौरान जिले में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, सफाई अभियान और जनसहभागिता से जुड़े आयोजन किए जाएंगे, जिससे लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित हो सके।
उन्होंने आगे कहा कि जल संकट एक वैश्विक चुनौती बन चुका है और इसे देखते हुए जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। “जल महोत्सव 2026” के माध्यम से लोगों को पानी के महत्व, उसके संरक्षण के उपायों और जल के समुचित उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश देते हुए कहा कि इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) ने कहा कि गंगा की स्वच्छता केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए आमजन की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गंगा और अन्य जल स्रोतों में कचरा न डालें और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में योगदान दें। उन्होंने यह भी बताया कि पखवाड़ा के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा और विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित DRDA निदेशक ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मनरेगा एवं अन्य योजनाओं के माध्यम से जल संचयन, तालाबों का जीर्णोद्धार और वर्षा जल संचयन जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य न केवल जल संरक्षण करना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाना है।
जिला गंगा समिति के DPO ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि “गंगा स्वच्छता पखवाड़ा” के तहत जिले के विभिन्न घाटों पर सफाई अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को प्लास्टिक के उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाएगा और सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान स्वयंसेवी संस्थाओं, छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
कार्यक्रम में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, बिहार सरकार, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग तथा पुलिस विभाग के प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही। सभी विभागों ने अपने-अपने स्तर पर इस अभियान को सफल बनाने के लिए सहयोग देने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि गंगा की स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे इस अभियान को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें।
इस दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने गंगा की स्वच्छता बनाए रखने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की शपथ भी ली। शपथ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हर व्यक्ति को अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना चाहिए।
गौरतलब है कि गंगा नदी भारत की जीवन रेखा मानी जाती है और करोड़ों लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है। लेकिन बढ़ते प्रदूषण और अव्यवस्थित कचरा प्रबंधन के कारण इसकी स्वच्छता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। ऐसे में “गंगा स्वच्छता पखवाड़ा एवं जल महोत्सव 2026” जैसे कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक हैं, बल्कि यह समाज में जागरूकता लाने का एक प्रभावी माध्यम भी साबित हो सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने का लक्ष्य अवश्य हासिल किया जा सकता है।
