जगदीशपुर अंचल अधिकारी पर सीजीएम कोर्ट में नालसी मुकदमा, जमीन मोटेशन को लेकर लगा गंभीर आरोप

भागलपुर में जमीन से जुड़े एक चर्चित मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। जगदीशपुर अंचल के अंचल अधिकारी (सीओ) सतीश कुमार के विरुद्ध मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजीएम) कोर्ट में नालसी मुकदमा दायर किया गया है। यह मुकदमा जमीन के मोटेशन को लेकर न्यायालय के आदेश की कथित अवहेलना से संबंधित है।
मामले के अनुसार, मानिक सरकार घाट रोड निवासी तपन विश्वास ने भागलपुर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता आलय बनर्जी के माध्यम से सीजीएम न्यायालय में परिवाद दायर किया है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय तथा सब जज भागलपुर द्वारा पारित आदेशों के बावजूद जगदीशपुर के अंचल अधिकारी सतीश कुमार ने विपक्षी पक्ष से कथित रूप से मिलीभगत कर बहुमूल्य जमीन का मोटेशन उनके नाम कर दिया।

87 कट्ठा जमीन के मोटेशन पर विवाद
दायर नालसी मुकदमे में कहा गया है कि संबंधित भूमि लगभग 87 कट्ठा की है, जिसकी बाजार में काफी ऊंची कीमत बताई जा रही है। परिवादी का आरोप है कि इस जमीन को लेकर पहले से न्यायालय में मामला विचाराधीन था और इस पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई अपेक्षित थी।

इसके बावजूद, आरोप है कि अंचल अधिकारी ने विपक्षियों के साथ तालमेल कर उक्त भूमि का मोटेशन उनके नाम करवा दिया तथा उनके पक्ष में रसीद निर्गत कर दी गई।
परिवाद में यह भी कहा गया है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों की अवमानना की श्रेणी में आती है और इससे परिवादी के अधिकारों का हनन हुआ है।
अन्य आरोपियों को भी बनाया गया पक्षकार
इस नालसी मुकदमे में केवल अंचल अधिकारी सतीश कुमार ही नहीं, बल्कि विपक्षी पक्ष की ओर से नूतन मिश्रा सहित अन्य व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया और विवादित भूमि पर अवैध रूप से अधिकार स्थापित करने की कोशिश की।
परिवादी की ओर से यह भी कहा गया है कि प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस प्रकार की कार्रवाई न्यायिक व्यवस्था के प्रति गंभीर चुनौती है।

अधिवक्ता ने दी जानकारी
मामले को लेकर परिवादी के अधिवक्ता आलय बनर्जी ने बताया कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद भूमि का मोटेशन किया जाना गंभीर विषय है।
बाइट – आलय बनर्जी, अधिवक्ता, सिविल कोर्ट, भागलपुर
उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लिए जाते हैं तो यह न्याय व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है। इसी कारण न्यायालय की शरण ली गई है ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

न्यायिक प्रक्रिया की ओर बढ़ा मामला
सीजीएम न्यायालय में दायर इस नालसी मुकदमे के बाद अब मामले ने कानूनी रूप ले लिया है। न्यायालय द्वारा परिवाद की प्रारंभिक सुनवाई के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं अन्य आरोपियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई संभव है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा का माहौल है। भूमि से जुड़े विवादों में अक्सर न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में न्यायालय की अवमानना जैसे आरोप गंभीर माने जाते हैं।

हालांकि, इस संबंध में अभी तक अंचल अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
परिवादी की ओर से न्यायालय से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भूमि के मोटेशन की प्रक्रिया किन परिस्थितियों में और किन आधारों पर की गई।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई हो।

आगे की सुनवाई पर टिकी नजरें
अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें सीजीएम न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है और आगे की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
इस प्रकार, भागलपुर में भूमि विवाद से जुड़ा यह मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है, जिससे आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *