डीएम जनता दरबार: मानपुर अंचल की भूमि व कब्जा संबंधी समस्याओं पर सख्त रुख
अधिकारियों को फटकार, दोबारा नापी व जांच के निर्देश

जिला पदाधिकारी गया श्री शशांक शुभंकर के दैनिक जनता दरबार में प्राप्त आवेदनों की नियमित समीक्षा के क्रम में आज मानपुर अंचल क्षेत्र से जुड़े आवेदकों एवं संबंधित पदाधिकारियों को डीएम के समक्ष बुलाकर समस्याओं की गहन समीक्षा की गई। जिन आवेदनों का अब तक निराकरण नहीं हो सका था, उन्हें जिला पदाधिकारी के मॉनिटरिंग कोषांग के माध्यम से सूचीबद्ध कर समीक्षा की जा रही है।

समीक्षा के दौरान मानपुर अंचल के कई गंभीर मामलों पर जिला पदाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।

गलत नापी पर डीएम की नाराजगी
मानपुर क्षेत्र के आवेदक नकसी प्रसाद ने बताया कि उन्होंने निजी जमीन की मापी को लेकर जनता दरबार में आवेदन दिया था। अंचलाधिकारी मानपुर ने जानकारी दी कि मानपुर रेलवे लाइन परियोजना के तहत आवेदक की जमीन अधिग्रहण में ली जा रही है, इसी कारण मापी का आवेदन दिया गया था।

आवेदक ने आरोप लगाया कि अंचल अमीन द्वारा गलत नापी रिपोर्ट तैयार की गई है। इस पर जिला पदाधिकारी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद न तो आवेदक को मापी में शामिल किया गया और न ही मापी प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। डीएम ने अंचलाधिकारी मानपुर से स्पष्टीकरण मांगते हुए दोबारा जमीन मापी कराने का निर्देश दिया।

सरकारी शौचालय तोड़कर कब्जा करने का आरोप
मानपुर की आवेदक रश्मि देवी ने शिकायत की कि उनके घर के बगल में दबंग व्यक्तियों द्वारा जबरन जमीन पर कब्जा किया जा रहा है, साथ ही सरकारी शौचालय को भी तोड़कर कब्जा किया गया है।

अंचलाधिकारी मानपुर ने जांच में इसे आपसी विवाद बताया। इस पर जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकारी शौचालय को तोड़ने और सरकारी/सहकारी भूमि पर अवैध कब्जा के मामले में दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

केवाला जांच के लिए 7 दिन की समय-सीमा
मानपुर के ही आवेदक जलजीत सिंह ने जमीन मापी से संबंधित आवेदन दिया था। अंचलाधिकारी ने बताया कि आपसी विवाद एवं दूसरे पक्ष के पास केवाला (रजिस्ट्री दस्तावेज) होने के कारण मापी और कब्जा संभव नहीं हो पा रहा है। केवाला की जांच कराए जाने की जानकारी भी दी गई।

इस पर जिला पदाधिकारी ने असंतोष व्यक्त करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी एवं जिला सब-रजिस्टार को अगले 7 दिनों के भीतर केवाला की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने स्पष्ट कहा कि जनता दरबार में आए मामलों का समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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