तेजस्वी यादव का आरोप: “बिहार की मतदाता सूची रद्द कर वोटिंग अधिकार छीनने की साजिश रच रही है केंद्र सरकार”

पटना, 28 जून 2025 – बिहार की राजनीति में एक बार फिर से उबाल आ गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “निर्वाचन आयोग को दबाव में लेकर बिहार की पूरी मतदाता सूची को निरस्त करने और केवल 25 दिन में 1987 से पहले के कागजी दस्तावेज़ों के आधार पर नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है।”
तेजस्वी यादव ने इस कदम को “मतदान अधिकार छीनने की साजिश” करार देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के खिलाफ एक खतरनाक षड्यंत्र है। उन्होंने कहा, “चुनावी हार की बौखलाहट में अब ये लोग बिहार और बिहारियों से वोट का हक छीनना चाहते हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर लाखों मतदाताओं का नाम काटा जाएगा, ताकि वे मतदाता पहचान पत्र बनवा ही न सकें।”
प्रेस वार्ता में तेजस्वी यादव ने आशंका जताई कि यदि लोगों के वोट काट दिए गए तो इसका प्रभाव केवल चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति, आरक्षण जैसी तमाम योजनाओं से भी उन्हें वंचित कर दिया जाएगा, क्योंकि इन योजनाओं के लिए पहचान के प्रमाण के रूप में अक्सर वोटर आईडी की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि महागठबंधन इस मुद्दे को सड़कों से लेकर संसद तक उठाएगा। “यह केवल बिहार का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे भारत के लोकतंत्र पर हमला है। हम इसे किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे,” तेजस्वी ने चेताया।
प्रेस वार्ता में उनके साथ महागठबंधन के अन्य प्रमुख नेताओं की मौजूदगी भी रही। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग की कि बिहार में मतदाता सूची को लेकर कोई भी पुनरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी और संविधान सम्मत ढंग से की जाए तथा आम जनता को भयभीत करने वाली कोई कार्रवाई रोकी जाए।
तेजस्वी यादव के बयान ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बहस और विरोध तेज़ होने की पूरी संभावना है।
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