पटना में परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की शुरुआत, जनसंख्या स्थिरीकरण हेतु 48 सारथी रथ रवाना

पटना, 02 मार्च 2026
जनसंख्या स्थिरीकरण एवं परिवार नियोजन के प्रति व्यापक जन-जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से 06 मार्च से 20 मार्च तक आयोजित होने वाले परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की तैयारियों के तहत आज पटना समाहरणालय परिसर से एक महत्वपूर्ण जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। जिलाधिकारी, पटना द्वारा ई-रिक्शा आधारित “सारथी रथों” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ पूरे जिले में भ्रमण कर लोगों को परिवार नियोजन एवं जनसंख्या नियंत्रण के प्रति जागरूक करेंगे।
इस अभियान के अंतर्गत कुल 48 सारथी रथ जिला के विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों में जाकर आम नागरिकों से संवाद स्थापित करेंगे। इन रथों के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध नि:शुल्क सेवाओं के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।
जिलाधिकारी ने इस अवसर पर कहा कि जनसंख्या नियंत्रण केवल एक स्वास्थ्य विषय नहीं, बल्कि यह राज्य और देश के समग्र विकास से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि संतुलित जनसंख्या ही बेहतर विकास दर, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण तथा मानव विकास सूचकांक (HDI) में सुधार सुनिश्चित कर सकती है।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों, स्वास्थ्य कर्मियों, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे इस पखवाड़ा को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता आवश्यक है।
घर-घर पहुँचेगी परिवार नियोजन की जानकारी
सारथी रथों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसमें अस्थायी एवं स्थायी उपायों के साथ-साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।
इन रथों पर ऑडियो-वीडियो संदेश, पोस्टर एवं सूचना सामग्री के माध्यम से यह बताया जाएगा कि छोटे परिवार का क्या महत्व है और कैसे नियोजित परिवार से बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित किया जा सकता है। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन से जुड़ी सेवाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध हैं।
गाँव-गाँव में चलेगा जन-जागरूकता अभियान
परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं एएनएम के सहयोग से घर-घर संपर्क अभियान भी चलाएगी। इसमें नवविवाहित दंपतियों एवं प्रजनन आयु वर्ग के दंपतियों को विशेष रूप से जागरूक किया जाएगा।
जागरूकता कार्यक्रमों के तहत सामुदायिक बैठकें, शिविर एवं स्वास्थ्य संवाद भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में महिलाओं एवं पुरुषों दोनों को शामिल कर साझा जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर बल दिया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास
इस अभियान में State Health Society, Bihar, Bihar Health Department तथा Information & Public Relations Department, Government of Bihar की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इन विभागों के सहयोग से परिवार नियोजन से संबंधित संदेशों का व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा।
राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप यह अभियान मुख्यमंत्री Nitish Kumar के सुशासन एवं जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विकास और जनसंख्या का संतुलन आवश्यक
विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या वृद्धि की गति यदि नियंत्रित नहीं की गई, तो विकास योजनाओं का प्रभाव सीमित हो सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ता दबाव सामाजिक असमानताओं को बढ़ा सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि छोटा परिवार न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ होता है, बल्कि बच्चों के बेहतर पोषण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए भी सहायक होता है।
सभी हितधारकों से सहयोग की अपील
जिलाधिकारी ने सभी स्टेकहोल्डर्स—स्वास्थ्य कर्मियों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों एवं आम नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसके प्रति सजग एवं प्रतिबद्ध रहेगा, तो राज्य का मानव विकास सूचकांक बेहतर होगा और समावेशी विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।
परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के सफल आयोजन के साथ ही जिला प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले समय में जनसंख्या नियंत्रण के प्रति लोगों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा।
