पटना में BMSICL के DGM पंकज कुमार पर शिकंजा, 96 लाख से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज

पटना। बिहार की राजधानी पटना से भ्रष्टाचार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। विशेष निगरानी इकाई (स्पेशल विजिलेंस यूनिट) ने बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) में तैनात उप महाप्रबंधक (डीजीएम–प्रोजेक्ट) पंकज कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और निगरानी विभाग की टीम मामले की गहन जांच में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार विशेष निगरानी इकाई को लंबे समय से पंकज कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें मिल रही थीं। प्रारंभिक जांच के बाद जब आरोपों में सत्यता पाई गई, तो निगरानी विभाग ने उनके खिलाफ औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर लिया। आरोप है कि पंकज कुमार ने अपनी लगभग 11 वर्ष की सेवा अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है।
निगरानी विभाग द्वारा की गई जांच के अनुसार पंकज कुमार ने अपनी वैध आय से लगभग 96 लाख 46 हजार 666 रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की है। यह राशि उनकी घोषित आय और उपलब्ध स्रोतों के अनुपात से काफी अधिक बताई जा रही है। इसी आधार पर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
निगरानी विभाग ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(b), 13(2) और धारा 12 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इन धाराओं के तहत सरकारी पद पर रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करना गंभीर अपराध माना जाता है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
मामला दर्ज होने के बाद विशेष न्यायाधीश निगरानी, पटना से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया। इसके आधार पर गुरुवार को निगरानी विभाग की टीम ने पटना में पंकज कुमार के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। बताया जा रहा है कि छापेमारी उनकी कार्यालय परिसर और आवासीय स्थानों पर की जा रही है।
निगरानी विभाग के अधिकारियों की अलग-अलग टीमों ने सुबह से ही कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य मिलने की संभावना है, जो इस मामले की जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार निगरानी टीम आरोपी के बैंक खातों, निवेश, जमीन-जायदाद और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी ने किसी अन्य व्यक्ति या रिश्तेदार के नाम पर भी संपत्ति अर्जित की है। यदि ऐसा पाया जाता है तो उस आधार पर भी आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण संस्था है, जो स्वास्थ्य विभाग से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास, अस्पतालों के निर्माण और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति जैसे कार्यों की जिम्मेदारी निभाती है। ऐसे में इस संस्था से जुड़े किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगना प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर माना जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं निगरानी विभाग की टीम फिलहाल पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है।
निगरानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सभी वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की विस्तृत जांच की जाती है। इसमें बैंक खाते, चल-अचल संपत्ति, निवेश, वाहन और अन्य संपत्तियों का मूल्यांकन किया जाता है। इसके बाद ही यह तय किया जाता है कि आरोपी ने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है या नहीं।
इस मामले में भी प्रारंभिक जांच के आधार पर केस दर्ज किया गया है और अब छापेमारी के माध्यम से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि छापेमारी के बाद मामले से जुड़े कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
वहीं निगरानी विभाग के सूत्रों का कहना है कि बिहार सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सख्त रुख अपना रही है। राज्य में समय-समय पर निगरानी विभाग द्वारा ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाती रही है। इसका उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बनाए रखना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।
फिलहाल पंकज कुमार के खिलाफ दर्ज इस मामले को लेकर जांच जारी है। निगरानी विभाग की टीम छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच निगरानी विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि छापेमारी के बाद और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो मामले का दायरा और भी बढ़ सकता है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर निगरानी विभाग की पैनी नजर बनी हुई है और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।

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