पीजी हॉस्टल में ‘नाग-लोक’ का आतंक: हर दिन निकल रहा एक नया सांप, छात्राएं खौफ में – प्रशासन मौन

रिपोर्ट: शयामानंद सिंह, भागलपुर

भागलपुर।
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के पीजी छात्रावास में बीते कई दिनों से रोज़ाना साँप निकलने की घटनाओं ने छात्राओं में भय और असुरक्षा की भावना भर दी है। सांपों के इस ‘नाग-लोक’ जैसे माहौल ने हॉस्टल में रह रही छात्राओं को मजबूर कर दिया है कि वे हर रोज़ सतर्कता के साथ एक-एक कोने को जांचें, कहीं कोई विषधर उनका इंतज़ार तो नहीं कर रहा।

प्रशासन की उदासीनता बनी चिंता का विषय
विश्वविद्यालय इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की मंत्री विष्णुप्रिया ने बताया कि बीते दिनों भी छात्रावास के वॉशरूम से एक साँप बरामद हुआ था, और आज फिर एक और साँप निकलने की घटना सामने आई है। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन इस गंभीर स्थिति को लेकर अब तक मौन है। विष्णुप्रिया ने बताया कि इससे पहले भी हॉस्टल की बदहाल स्थिति को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

गंदगी और जलजमाव बनी खतरे की जड़
छात्राओं का कहना है कि बाढ़ और भारी वर्षा के कारण छात्रावास परिसर में जलजमाव और गंदगी की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते लगातार सांपों का प्रवेश हो रहा है। एक छात्रा ने बताया, “हम अब कमरे का दरवाज़ा खोलने से पहले दो बार सोचते हैं। रात को नींद नहीं आती कि कहीं बिस्तर में कोई साँप न घुस आए।”

छात्राओं की मांगें
ABVP मंत्री विष्णुप्रिया ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि—

  • छात्रावास की तत्काल सफाई कराई जाए
  • परिसर में फॉगिंग और कीटनाशक का छिड़काव करवाया जाए
  • जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाए
  • छात्रावास में आपातकालीन मेडिकल सुविधा और 24 घंटे हेल्पलाइन की व्यवस्था की जाए

सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय प्रशासन
लगातार हो रही इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन न केवल छात्राओं की सुरक्षा को लेकर उदासीन है, बल्कि मूलभूत व्यवस्थाओं को भी नजरअंदाज कर रहा है। अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है।

छात्राएं बनीं ‘साँप-सावधान एक्सपर्ट’
हॉस्टल की छात्राएं मज़बूरी में अब साँप पहचानने और भगाने के घरेलू उपाय सीख रही हैं। एक छात्रा ने हँसते हुए कहा, “अब तो हम इतनी एक्सपर्ट हो गई हैं कि साँप की परछाईं देखकर भी पहचान जाती हैं किस प्रजाति का है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *