बहोरना पुल का डायवर्सन फिर टूटा, खेसर-तारापुर मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप
ग्रामीणों में आक्रोश, सरकार से स्थायी पुल निर्माण की मांग तेज

फुल्लीडुमर (बांका)। खेसर-तारापुर मुख्य मार्ग पर बहोरना गांव के समीप लोहागढ़ नदी पर बने अस्थायी डायवर्सन का एक बड़ा हिस्सा गुरुवार की रात तेज बारिश के कारण आई बाढ़ में बह गया। लगभग 100 फीट लंबे डायवर्सन का करीब 40 फीट हिस्सा नदी में समा गया, जिससे शुक्रवार सुबह से इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया।
गौरतलब है कि यह वही डायवर्सन है जो पिछले वर्ष भी बरसात के दौरान बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ था। हालांकि प्रशासन द्वारा एक सप्ताह के भीतर उसकी मरम्मत कर आवाजाही बहाल कर दी गई थी। इस वर्ष पुनः हुई टूट-फूट से खेसर चाजार से मुंगेर जिले के तारापुर को जोड़ने वाली लगभग 18 किलोमीटर की सड़क पर स्थित दर्जनों गांवों का संपर्क पूरी तरह से कट गया है।
इस मार्ग के माध्यम से खेसर, डुमरिया, बहोरना, जोगिया, निझरी, भरतशिला, परमानंदपुर, भलुआ, बोधनागर, गुलनी, कुश्याहा आदि गांवों के हजारों लोग रोजाना आवाजाही करते हैं। अब ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाकर वैकल्पिक मार्ग से सफर करना पड़ रहा है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।
स्थायी पुल का निर्माण नहीं, ग्रामीणों में गुस्सा
बहोरना गांव के श्रवण कुमार मंडल, कुमार रति देव, पवन कुमार, सुमित कुमार, अभिषेक कुमार, देवराज, कुणाल, निखिल, सोनू, संतोष, छोटू आदि ग्रामीणों ने बताया कि पुल ध्वस्त हुए एक वर्ष से अधिक हो गया है, परंतु आज तक स्थायी पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
“खेसर-तारापुर पथ का जीर्णोद्धार कार्य तो हो रहा है, लेकिन जब तक नदी पर पक्का पुल नहीं बनेगा, तब तक यह मार्ग अधूरा ही रहेगा,” ग्रामीणों ने कहा। उन्होंने सरकार से अविलंब नए पुल निर्माण की मांग की है, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश
पुल की अनुपस्थिति ने जहां स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, वहीं मरीजों, छात्रों एवं व्यापारियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नदी पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद अब तक इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
