बिहार सरस मेला–2025 का भ्रमण, ग्रामीण उद्यमिता को मिला नया संबल जीविका दीदियों के स्टॉल बने आत्मनिर्भरता और हस्तकौशल की पहचान

पटना। आज पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित बिहार सरस मेला–2025 का भ्रमण किया गया। यह मेला ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण उद्यमियों एवं जीविका दीदियों को उनके उत्पादों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराना है।

भ्रमण के दौरान मेले में की गई व्यवस्थाओं, आगंतुकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा स्टॉल संचालन की स्थिति की जानकारी ली गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मेले में स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल, बिजली एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध रहें, ताकि दूर-दराज से आए कारीगरों और आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सरस मेला में जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन स्टॉलों पर हस्तशिल्प, हथकरघा, खाद्य उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं एवं पारंपरिक कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जो उनके परिश्रम, आत्मनिर्भरता और उत्कृष्ट हस्तकौशल को दर्शाती हैं। आगंतुकों द्वारा इन उत्पादों की सराहना के साथ-साथ खरीदारी भी की जा रही है।

इस अवसर पर कहा गया कि राज्य सरकार ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। जीविका दीदियों के संवर्द्धन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग दिया जा रहा है, ताकि वे स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि बिहार सरस मेला–2025 ग्रामीण उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने में सफल होगा और इससे न केवल जीविका दीदियों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि बिहार की पारंपरिक कला एवं संस्कृति को भी राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी।

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