भागलपुर बूढ़ानाथ मोहल्ला में मधुश्रावणी पर्व का पारंपरिक समापन, नवविवाहिता मेघा मिश्रा ने निभाई पूजा विधि

भागलपुर: मिथिलांचल की सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित नवविवाहिता महिलाओं का 13 दिवसीय तपस्या पर्व मधुश्रावणी शनिवार, 27 जुलाई को टेमी दागने की परंपरा के साथ संपन्न हुआ। भागलपुर के बूढ़ानाथ मोहल्ले में नवविवाहिता मेघा मिश्रा ने पूरे विधि-विधान से इस अनुष्ठान को संपन्न किया।
मधुश्रावणी पर्व के अंतिम दिन नवविवाहिता के घुटनों और पंजों पर जलते दीपक की बाती से दाग दिया जाता है, जिसे ‘टेमी दागना’ कहा जाता है। यह अनुष्ठान नवविवाहिता द्वारा अपने मायके में रहकर ससुराल से प्राप्त पूजन सामग्री से संपन्न किया जाता है।
इस पर्व में महिला पुजारी प्रतिदिन सावित्री-सत्यवान, शिव-पार्वती, राम-सीता, राधा-कृष्ण, मैना पंचमी, विषहरी, बिहुला-मनसा, मंगला गौरी, समुद्र मंथन तथा सती की कथाएं सुनाती हैं। साथ ही महिलाएं गोसाईं गीत, कोहबर गीत, गौरी भगवती गीत जैसे पारंपरिक लोक गीत गाती हैं।
पूजा स्थल पर मिट्टी से निर्मित शिव-पार्वती, नाग-नागिन, हाथी और विषहरी की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। स्थल को बांस के पत्तों, बेलपत्र, पुष्पों और मैथिली लोक चित्रकला से सजाया जाता है। अंतिम दिन इन मूर्तियों और पूजन सामग्री का जल में विसर्जन कर पूजा का समापन किया जाता है।
