माघी पूर्णिमा पर अगुवानी गंगा घाट पर उमड़ा जनसैलाब, व्यवस्थाओं की पोल खुली

अगुवानी (खगड़िया)।
माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर अगुवानी स्थित उत्तरवाहिनी मां गंगा के तट पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। अहले सुबह से ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घाट पर पहुंचते रहे। “जय मां गंगा” के जयघोष और भक्तिमय माहौल के बीच श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को माघी पूर्णिमा की बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। हालांकि, श्रद्धा के इस महासंगम के बीच घाट की अव्यवस्थित स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवाल
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद घाट पर बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों का घोर अभाव देखने को मिला।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि—
घाट का समतलीकरण नहीं कराया गया, जिससे फिसलन और दुर्घटना की आशंका बनी रही।
बैरिकेटिंग की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे भीड़ अनियंत्रित रूप से आगे बढ़ती रही।
श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल या स्वयंसेवक तैनात नहीं दिखे।

मेला कमेटी द्वारा पहले यह कहा गया था कि एक अतिरिक्त अस्थायी पुल का निर्माण कराया जाएगा, लेकिन वह भी धरातल पर नजर नहीं आया।
अपने जोखिम पर स्नान को मजबूर श्रद्धालु
स्थिति यह रही कि लाखों श्रद्धालु अपने जोखिम पर गंगा स्नान करने को मजबूर दिखे। अगर किसी भी स्थिति में भीड़ अनियंत्रित होती है या कोई बड़ा हादसा घटता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—यह सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अक्सर ऐसे आयोजनों में प्रशासन की ओर से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि “सवारी अपने सामान की खुद जिम्मेदार है”, लेकिन जब बात मानव जीवन और सुरक्षा की हो, तो जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की भी बनती है।

श्रद्धालु या सिर्फ वोटर?
कई लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हिंदू बाहुल्य देश में हिंदू केवल वोट देने तक ही सीमित रह गया है, जबकि धार्मिक आयोजनों में व्यवस्थाओं के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है।

लोगों ने तंज कसते हुए कहा—
“व्यवस्था शून्य, लेकिन क्रेडिट लेने वालों की संख्या हजार।”
प्रशासन से ठोस पहल की मांग
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि भविष्य में इस तरह के बड़े धार्मिक आयोजनों को देखते हुए पूर्व तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि आस्था का यह पर्व किसी अनहोनी में न बदले।

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