मातृभाषा दिवस पर मध्य विद्यालय जगदीशपुर में शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

जगदीशपुर: भाषाई विविधता, सांस्कृतिक पहचान और बहुभाषिकता के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से शनिवार को विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर मध्य विद्यालय जगदीशपुर में एक व्यापक शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में निबंध लेखन, कविता लेखन, चित्रांकन, स्लोगन लेखन, समूह गान एवं परिचर्चा जैसे विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष चन्द्र मिश्र द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सोच, संस्कृति और पहचान की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि बच्चे जिस भाषा में जन्म से सोचते और समझते हैं, उसी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने पर उनका मानसिक विकास अधिक प्रभावी ढंग से होता है। मातृभाषा अन्य भाषाओं को सीखने के लिए एक मजबूत सेतु का कार्य करती है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में प्रारंभिक स्तर पर मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों में अवधारणात्मक समझ को मजबूत करना और शिक्षा को अधिक सहज एवं प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी बात स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त कर पाते हैं।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने मातृभाषा के महत्व, भाषा और संस्कृति के संबंध तथा बदलते समय में स्थानीय भाषाओं के संरक्षण जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं कविता लेखन प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी भावनाओं को शब्दों में ढालते हुए मातृभाषा के प्रति प्रेम और सम्मान को अभिव्यक्त किया।
चित्रांकन प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने रंगों के माध्यम से भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया। कई चित्रों में भारत की विभिन्न भाषाओं और परंपराओं की झलक देखने को मिली। स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में बच्चों ने मातृभाषा संरक्षण के संदेश को प्रभावशाली और प्रेरक शब्दों में प्रस्तुत किया।

समूह गान के दौरान विद्यार्थियों ने मातृभाषा की महत्ता को दर्शाने वाले गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरे विद्यालय परिसर में भावनात्मक और प्रेरणादायक वातावरण बन गया। परिचर्चा सत्र में छात्रों ने मातृभाषा के उपयोग, उसके संरक्षण और आधुनिक युग में उसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में शिक्षिका वीणा कुमारी, प्रज्ञा, प्रीति कुमारी, प्रतिमा कुमारी, शाहिना खातून एवं नेहा कुमारी ने विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं के लिए प्रेरित किया तथा उनका मार्गदर्शन किया। वहीं शिक्षक निर्भय कुमार, अमित कुमार सिंह एवं राजीव कुमार ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
शिक्षकों ने छात्रों को बताया कि मातृभाषा हमारी जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। यदि हम अपनी भाषा को भूल जाते हैं, तो हम अपनी पहचान और परंपरा से भी दूर हो जाते हैं। इसलिए मातृभाषा का संरक्षण केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकता भी है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने अपनी मातृभाषा में विचार व्यक्त करते हुए यह संदेश दिया कि भाषा केवल बोलने का माध्यम नहीं, बल्कि सोचने और समझने का आधार है। इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में भाषा के प्रति सम्मान, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता का विकास होता है।

अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी प्रतिभागियों की सराहना की गई और उन्हें भविष्य में भी इस प्रकार की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। आयोजन का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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