सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई के साथ गतिविधियों पर जोर, ‘सुरक्षित शनिवार’ कार्यक्रम से बढ़ रही जागरूकता

सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में अब सिर्फ शैक्षणिक ही नहीं बल्कि सर्वांगीण विकास की दिशा में भी बदलाव दिखाई देने लगा है। शनिवार को आयोजित होने वाली गतिविधियाँ अब बच्चों को किताबों तक सीमित न रखते हुए उन्हें समाजिक, सांस्कृतिक और व्यवहारिक जीवन से जोड़ रही हैं।
इसी क्रम में शनिवार को विद्यालयों में आयोजित मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत ‘सुरक्षित शनिवार’ मनाया गया। इस दौरान बच्चों ने बाल अधिकार, बाल विवाह निषेध, बाल शोषण और बाल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम, नाटक, पोस्टर निर्माण, समूह चर्चा और प्रश्नोत्तरी में भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल बच्चों को जानकारी देना था, बल्कि उन्हें समाज में इन मुद्दों पर जागरूक नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार करना भी है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष चंद्र मिश्र ने बताया कि अब स्कूल की शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रह गई है।
उन्होंने कहा—
“हमारा उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ, आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनाना है। विद्यालय में बच्चों के स्वास्थ्य, मानसिक विकास और वैज्ञानिक सोच पर विशेष ध्यान दिया जाता है।”
विद्यालय में बच्चों को हर दिन शारीरिक व्यायाम, स्वच्छ एवं पौष्टिक मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाता है। वहीं दूसरी ओर प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, इंस्पायर अवार्ड मानक, आईसीटी लैब, इको क्लब, और विशेष दिवसों पर प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं, जिससे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच विकसित हो रही है।
अभिभावकों और स्थानीय समुदाय में इस मॉडल की सराहना की जा रही है और यह माना जा रहा है कि ऐसे प्रयास आने वाले समय में सरकारी विद्यालयों को शिक्षा और बाल विकास के नए मानक स्थापित करने में मदद करेंगे।
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