“सशक्त महिला, समृद्ध बिहार” कार्यक्रम में 18 पिंक बसों को दिखाई गई हरी झंडी, ‘बिहार अपराजिता सम्मान’ से महिलाओं का सम्मान

पटना। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास निगम, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार की ओर से पटना स्थित ज्ञान भवन में “सशक्त महिला, समृद्ध बिहार” विषयक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देना, उन्हें सशक्त बनाना और समाज में उनके योगदान को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों से आईं महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी थे। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की मंत्री रमा निषाद, समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी, महिला एवं बाल विकास निगम के कार्यपालक निदेशक योगेश कुमार सागर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य में शुरू की गई 18 पिंक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इन बसों का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध कराना है। अधिकारियों ने बताया कि पिंक बस सेवा से महिलाओं को यात्रा के दौरान अधिक सुरक्षा और आत्मविश्वास मिलेगा। यह पहल महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा कार्यक्रम में स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन भी किया गया, जिसमें महिलाओं के स्वास्थ्य जांच और जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई और उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के शिविर महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह उन्मूलन हेतु मार्गदर्शिका का विमोचन भी किया गया। इस मार्गदर्शिका का उद्देश्य समाज में बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ जागरूकता फैलाना और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने में सहायता करना है। अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह न केवल लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, बल्कि उनके भविष्य को भी प्रभावित करता है। इसलिए इसे समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा।
इसके साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी उपलब्धियों को डिजिटल मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ‘बिहार शक्ति’ पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया। इस पोर्टल के माध्यम से राज्य की महिलाओं की उपलब्धियों, योजनाओं और विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी। अधिकारियों ने बताया कि यह पोर्टल महिलाओं को अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों को साझा करने का अवसर देगा और उन्हें सरकारी योजनाओं से जुड़ने में भी मदद करेगा।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और प्रेरणादायी हिस्सा वह रहा जब समाज में प्रेरणादायी कार्य करने वाली महिलाओं को “बिहार अपराजिता सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन महिलाओं को दिया गया जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर समाज के लिए प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। सम्मानित महिलाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाली कई प्रतिभाशाली महिलाएं शामिल थीं। मंच पर उन्हें प्रशस्ति पत्र और सम्मान चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि बिहार की महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। शिक्षा, प्रशासन, खेल, सामाजिक सेवा और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनका उद्देश्य उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना है।
कार्यक्रम में 11 अतिरिक्त वन स्टॉप सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन भी किया गया। इन केंद्रों का उद्देश्य हिंसा या उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाओं को एक ही स्थान पर कानूनी, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराना है। अधिकारियों ने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को त्वरित सहायता और न्याय दिलाने में मदद मिलेगी। इससे महिलाओं को सुरक्षा और भरोसा मिलेगा कि कठिन परिस्थितियों में सरकार उनके साथ खड़ी है।
समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना किसी भी समाज या राज्य का विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की सफलता पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है और सरकार ऐसे प्रयासों को हमेशा प्रोत्साहित करती रहेगी।
विशिष्ट अतिथि रमा निषाद ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना विकास की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे शिक्षा और आत्मनिर्भरता को अपनी ताकत बनाएं और समाज में बदलाव की प्रेरणा बनें।
समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने कहा कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जा रही है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना की और उन्हें समाज के लिए प्रेरणा बताया। मंच से यह संदेश भी दिया गया कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का समापन महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में समानता के संदेश के साथ हुआ। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करते हैं।
इस कार्यक्रम ने यह साबित किया कि जब महिलाओं को अवसर और सम्मान मिलता है तो वे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। “सशक्त महिला, समृद्ध बिहार” का संदेश केवल एक नारा नहीं बल्कि राज्य के विकास की दिशा में एक मजबूत संकल्प है, जिसे सरकार और समाज मिलकर साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
