स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली, जिलाधिकारी ने की सख्त कार्रवाई

खगड़िया। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सुधारने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिलाधिकारी श्री नवीन कुमार ने शुक्रवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बेलदौर और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC) कैठी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां उजागर हुईं, जिस पर डीएम ने तत्काल कड़ी कार्रवाई की।

डीएम ने बताया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए पूर्व में दो चरणों में निर्देश दिए गए थे। पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग को स्वयं निरीक्षण कर कमियों को चिन्हित करने को कहा गया था, जबकि दूसरे चरण में जिला स्तर से टीम गठित कर सभी केंद्रों का रोस्टर आधारित निरीक्षण प्रारंभ कराया गया। इसी क्रम में वे स्वयं बेलदौर पहुंचे।

मरीजों की बिना जांच दवा वितरण

निरीक्षण में पाया गया कि मरीजों की आवश्यक जांच, जैसे तापमान और अन्य वाइटल पैरामीटर दर्ज किए बिना ही दवाएं दी जा रही थीं। एक महिला ने शिकायत की कि बच्चे के बुखार के इलाज के लिए उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ी। इस पर संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी और दवा वितरण कर्मी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं, वाइटल जांच में लापरवाही बरतने पर संबंधित ANM का वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया।

दवाओं और सेवाओं की सूची प्रदर्शित नहीं

केंद्र पर उपलब्ध दवाओं की सूची न तो अद्यतन थी और न ही ठीक से प्रदर्शित। निःशुल्क सेवाओं और जांचों की सूची भी परिसर में नहीं लगी थी। इस लापरवाही के लिए ANM और डाटा एंट्री ऑपरेटर का वेतन स्थगित किया गया, जबकि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को वॉल पेंटिंग के जरिए सूची प्रदर्शित कराने का निर्देश दिया गया।

एक्स-रे और पैथोलॉजी सेवाओं में खामियां

निरीक्षण के दौरान एक्स-रे सेवा 24 घंटे उपलब्ध नहीं पाई गई। साथ ही IPD रजिस्टर अद्यतन नहीं था और भर्ती मरीजों का बेड-हेड टिकट भी संधारित नहीं किया जा रहा था। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से इस पर जवाब-तलब किया गया है।
पैथोलॉजी जांच में भी गंभीर खामियां मिलीं। CBC मशीन खराब अवस्था में थी, जबकि इसकी मरम्मत राज्य स्वास्थ्य समिति की चयनित एजेंसी से संभव थी। लापरवाही बरतने पर संबंधित लैब तकनीशियन का वेतन स्थगित कर दिया गया, जो तब तक प्रभावी रहेगा जब तक मशीन पूरी तरह चालू न हो जाए।

योजनाओं में गड़बड़ी और वेतन भुगतान में विलंब

जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रविष्टि कार्य ANM की जगह डाटा ऑपरेटर द्वारा किया जा रहा था, जो नियमों के विरुद्ध है। कई लाभार्थियों की प्रविष्टि लंबित भी मिली। इस पर MOIC का वेतन स्थगित कर दिया गया और ANM, डाटा ऑपरेटर व BHM से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जन्म प्रमाण पत्र निर्गमन कार्य भी आउटसोर्स स्टाफ से कराया जा रहा था। इस पर संबंधित डाटा ऑपरेटर का वेतन रोका गया।
साथ ही, ANM के वेतन भुगतान में अनावश्यक विलंब पाए जाने पर जिम्मेदार लिपिक का वेतन भी स्थगित कर दिया गया है।

जिलाधिकारी ने जताई कड़ी नाराज़गी

निरीक्षण के बाद डीएम नवीन कुमार ने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “यह जनहित से जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र है। पारदर्शिता, तत्परता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अनिवार्य है। जिन बिंदुओं पर खामियां मिलीं, वहां त्वरित कार्रवाई की गई है। भविष्य में यदि पुनरावृत्ति हुई तो और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।”

 

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