जगदीशपुर में 18 से 26 अप्रैल तक लक्ष्मी नारायण पंचकुंड महायज्ञ, 18 को निकलेगी भव्य शोभायात्रा

भागलपुर जिले के जगदीशपुर क्षेत्र में धार्मिक आस्था और भक्ति का वातावरण एक बार फिर चरम पर पहुंचने वाला है। आगामी 18 अप्रैल से 26 अप्रैल तक यहां श्री श्री 1008 श्री लक्ष्मी नारायण पंचकुंड महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर रविवार को यज्ञ स्थल पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन को सफल बनाने के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई।
बैठक की अध्यक्षता स्थानीय समाजसेवी आनारसी ताती ने की। इस दौरान आयोजन समिति के सदस्यों ने महायज्ञ से जुड़ी तैयारियों, व्यवस्थाओं और प्रचार-प्रसार को लेकर गंभीर चर्चा की। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस धार्मिक आयोजन को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में जानकारी दी गई कि महायज्ञ का शुभारंभ 18 अप्रैल की सुबह 8 बजे एक विशाल और भव्य शोभायात्रा के साथ किया जाएगा। यह शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में भ्रमण करेगी, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, बच्चे और संत-महात्मा शामिल होंगे। शोभायात्रा के दौरान भक्ति गीत, झांकियां, ध्वज और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ धार्मिक वातावरण का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। आयोजकों का कहना है कि यह शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता और एकता का संदेश देगी।
महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी किया जाएगा। कथा वाचन का दायित्व प्रसिद्ध कथावाचक श्री केशवाचार्य जी महाराज एवं युवराज स्वामी जी महाराज द्वारा निभाया जाएगा। दोनों संत अपने ओजस्वी प्रवचन और मधुर वाणी के लिए जाने जाते हैं, जिनके प्रवचनों को सुनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कथा का समय प्रतिदिन शाम 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, धर्म, भक्ति और जीवन के मूल्यों पर आधारित कथा का रसपान श्रद्धालुओं को कराया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस कथा के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होगा और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
बैठक में महायज्ञ के सफल आयोजन के लिए विभिन्न समितियों का गठन भी किया गया। प्रत्येक समिति को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। क्षेत्रवार जिम्मेदारियां बांटी गई हैं, जिसमें व्यवस्था समिति, जलपान समिति, सुरक्षा समिति, मंच संचालन समिति और प्रचार-प्रसार समिति शामिल हैं।
प्रचार-प्रसार को लेकर विशेष जोर दिया गया है। आयोजकों ने निर्णय लिया कि गांव-गांव जाकर लोगों को इस महायज्ञ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही पोस्टर, बैनर और सोशल मीडिया के माध्यम से भी आयोजन की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। स्थानीय युवाओं को भी इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया है।
बैठक में यह भी बताया गया कि महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यज्ञ स्थल पर बैठने की व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। साथ ही, बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
आयोजकों ने कहा कि यह महायज्ञ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता को भी मजबूत करेगा। ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोग आपसी भेदभाव को भूलकर एक मंच पर एकत्रित होते हैं।
बैठक में ओमकार मंडल उर्फ बीरबल मंडल, चंदन सिंह, फुट पंजियारा, पवन दुबे, नंदन कुमार, अनिल कुमार, धनंजय मंडल, रामरतन महतो, भुरगुनाथ मंडल समेत दर्जनों लोग उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में इस आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
स्थानीय लोगों में इस महायज्ञ को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। लोग अपने-अपने स्तर पर तैयारी में जुट गए हैं। महिलाओं द्वारा भजन-कीर्तन की तैयारी की जा रही है, वहीं युवा वर्ग शोभायात्रा और अन्य कार्यक्रमों को भव्य बनाने में जुटा हुआ है।
गौरतलब है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करते हैं। यह न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को भी स्थापित करते हैं।
आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस महायज्ञ में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करें और कार्यक्रम को सफल बनाएं। आने वाले दिनों में जगदीशपुर क्षेत्र पूरी तरह से भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आएगा, जहां हर ओर भगवान के जयकारे और भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई देगी।
