जगदीशपुर प्रखंड में मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप, हाजिरी और मस्टररोल पर उठे सवाल

जगदीशपुर। प्रखंड की कई पंचायतों में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता का आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सेवक और पंचायत तकनीकी सहायक की मिलीभगत से मजदूरों की डिजिटल हाजिरी में गड़बड़ी की जा रही है। साथ ही मस्टररोल में भी कथित तौर पर हेरफेर कर योजनाओं के नाम बदलकर सरकारी राशि के बंदरबांट का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, जगदीशपुर प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में डार खुदाई, सुरक्षा बांध निर्माण व मरम्मत, वृक्षारोपण सहित कई योजनाओं पर मनरेगा के तहत काम चल रहा है। आरोप है कि कुछ योजनाओं में वास्तविक रूप से काम करने वाले मजदूरों की जगह अन्य लोगों के नाम पर हाजिरी दर्ज की जा रही है। इससे मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी और योजना की वास्तविक लागत को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
छह पंचायतों में योजनाओं को लेकर शिकायत
उपलब्ध विवरण के अनुसार बैजानी, भवानीपुर देसरी, चांदपुर, जगदीशपुर, खिरीबांध और सैनो पंचायतों में मनरेगा योजनाओं से संबंधित आंकड़े दर्ज हैं। इनमें जगदीशपुर पंचायत में 15 योजनाओं से संबंधित 52 तथा 457 जैसी प्रविष्टियां दर्ज होने की बात सामने आई है। वहीं भवानीपुर देसरी में 10, 19 और 130,सैनो 9,42 तथा खिरीबांध में 2, 9 और 83 की प्रविष्टियां बताई गई हैं। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और इनके अलग-अलग कॉलम का अर्थ संबंधित विभाग से सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मस्टररोल में हेरफेर का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बावजूद कुछ योजनाओं में फर्जी हाजिरी का खेल चलने का आरोप है। आरोप है कि कार्यस्थल पर जितने मजदूर मौजूद रहते हैं, उससे अधिक मजदूरों की उपस्थिति रिकॉर्ड में दिखाई जाती है। इसके अलावा योजना के नाम और कार्य के स्वरूप में बदलाव कर मस्टररोल तैयार करने की भी शिकायत है।
जांच से सामने आ सकती है वास्तविकता
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और मनरेगा विभाग से सभी संबंधित पंचायतों में संचालित योजनाओं की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रत्येक योजना का स्थल निरीक्षण, मस्टररोल में दर्ज मजदूरों की सूची, NMMS से दर्ज डिजिटल हाजिरी, मजदूरों के बैंक खातों में भुगतान और योजना की तकनीकी स्वीकृति का मिलान कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि रिकॉर्ड में दर्ज मजदूरों ने वास्तव में काम किया है या नहीं।
ग्रामीणों ने रोजगार सेवक, पंचायत तकनीकी सहायक और योजना से जुड़े अन्य कर्मियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता या सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों और कर्मियों का पक्ष मिलने के बाद खबर को और स्पष्ट किया जा सकता है।
