बाल संसद सहित विभिन्न छात्र समितियों का गठन, मध्य विद्यालय जगदीशपुर में नई शैक्षणिक सत्र की सशक्त शुरुआत

जगदीशपुर। नई शैक्षणिक सत्र की सफल शुरुआत को लेकर मध्य विद्यालय जगदीशपुर में छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न संचालन समूहों एवं समितियों का विधिवत गठन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्साह और सहभागिता का माहौल देखने को मिला। बाल संसद, मीना मंच, ईको क्लब, यूथ क्लब, विज्ञान क्लब तथा गणित क्लब जैसी महत्वपूर्ण समितियों का गठन कर विद्यार्थियों को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष चन्द्र मिश्र ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के लिए छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन संचालन समूहों के माध्यम से बच्चों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। यह पहल न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाती है, बल्कि विद्यार्थियों को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण से भी जागरूक बनाती है।
उन्होंने आगे कहा कि जिन विद्यालयों में इस प्रकार की समितियां सक्रिय रहती हैं, वहां का वातावरण स्वच्छ, अनुशासित और प्रेरणादायक होता है। छात्र स्वयं विद्यालय के विभिन्न कार्यों में भाग लेते हैं और अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनते हैं। इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें व्यवहारिक जीवन के लिए भी तैयार करती हैं।
बाल संसद के गठन के दौरान विद्यार्थियों के बीच लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पदाधिकारियों का चयन किया गया। इस प्रक्रिया में बच्चों ने मतदान और चयन की प्रक्रिया को समझा और उसमें भाग लिया। बाल संसद के प्रधान मंत्री पद के लिए श्रेया का चयन किया गया, जबकि उप प्रधान मंत्री के रूप में रितु को जिम्मेदारी सौंपी गई। शिक्षा मंत्री के रूप में परी और उप शिक्षा मंत्री के रूप में नीतू को चयनित किया गया। इसके अलावा कोमल और तन्नु को विभिन्न समितियों में महत्वपूर्ण दायित्व दिए गए।
मीना मंच के माध्यम से छात्राओं को विशेष रूप से सशक्त बनाने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा। वहीं ईको क्लब पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और हरित वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूथ क्लब के माध्यम से युवाओं में ऊर्जा और सकारात्मक सोच का विकास किया जाएगा, जबकि विज्ञान क्लब और गणित क्लब छात्रों में वैज्ञानिक सोच और तार्किक क्षमता को बढ़ावा देने का कार्य करेंगे।
इस अवसर पर ‘डिटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया प्लान’ के अंतर्गत स्वच्छता शिक्षा कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वच्छता के महत्व से अवगत कराना और उन्हें दैनिक जीवन में स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को हाथ धोने की सही विधि, साफ-सफाई बनाए रखने के तरीके और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।
जिला स्तर से आए प्रतिनिधि शंभू कुमार सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घर, विद्यालय और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आज के बच्चे ही कल के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे, इसलिए उन्हें अभी से अच्छे संस्कार और आदतों को अपनाना चाहिए।
विद्यालय समन्वयक चंद्रकांत भारती ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सभी समितियों के गठन की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराया और बच्चों को उनके दायित्वों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यालय में अनुशासन और गुणवत्ता दोनों को मजबूत करेगी।
इस अवसर पर नोडल शिक्षक वीणा कुमारी, शाहिना खातून, प्रतिमा मिश्रा, प्रज्ञा, प्रीति कुमारी और भारती कुमारी सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। सभी शिक्षकों ने छात्रों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अपने विचार भी साझा किए। बाल संसद की नव-निर्वाचित प्रधान मंत्री श्रेया ने कहा कि वह अपने पद की जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगी और विद्यालय के विकास में योगदान देंगी। उप प्रधान मंत्री रितु ने कहा कि वह सभी विद्यार्थियों को साथ लेकर चलेंगी और विद्यालय में सकारात्मक माहौल बनाए रखने का प्रयास करेंगी।
समग्र रूप से देखा जाए तो मध्य विद्यालय जगदीशपुर में विभिन्न समितियों का गठन एक सराहनीय पहल है, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस प्रकार के प्रयास निश्चित रूप से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होंगे और बच्चों को एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करेंगे।
