भारत से खरीदारी पर नेपाल सरकार सख्त, 100 रुपये से अधिक के सामान पर लगेगा भंसार शुल्क

रिपोर्ट – मनोज कुमार, कटिहार/बिहार
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक अहम और प्रभावशाली फैसला सामने आया है। नेपाल सरकार ने भारत से खरीदारी करने वालों के लिए नियमों को सख्त करते हुए 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार (कस्टम ड्यूटी) अनिवार्य कर दिया है। इस नए प्रावधान के तहत अब किसी भी व्यक्ति को निर्धारित सीमा से अधिक मूल्य के सामान पर शुल्क चुकाना होगा, जो पांच प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक हो सकता है।
नेपाल सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देना और बाहरी बाजारों पर निर्भरता को कम करना बताया जा रहा है। हालांकि, इस निर्णय का सीधा असर भारत-नेपाल सीमा पर बसे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और छोटे व्यापारियों के व्यवसाय पर पड़ता दिख रहा है।
भारत और नेपाल के बीच सीमा पार व्यापार वर्षों से आम जनजीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीदने के लिए एक-दूसरे के बाजारों पर निर्भर रहते हैं। खासकर नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के लोग सस्ता और सुलभ सामान खरीदने के लिए भारतीय बाजारों का रुख करते रहे हैं।
नेपाल सरकार के नए आदेश के बाद इन क्षेत्रों में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, काठमांडू में बालेन शाह मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद सीमा क्षेत्र के प्रशासन ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को इस नियम की जानकारी देना शुरू कर दिया है। इससे आम लोगों के बीच चिंता और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्णय उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को प्रभावित करेगा। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले अधिकांश लोग दाल, चावल, तेल, नमक, चीनी, सब्जियां, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं भारतीय बाजारों से खरीदते हैं, क्योंकि यहां ये सामान अपेक्षाकृत सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं।
नेपाल के गीता कार्की, राहुल बस्नेत और मयंग थापा जैसे स्थानीय नागरिकों ने बताया कि भारत के बाजार उनके लिए जीवनरेखा की तरह हैं। वे रोजाना 200 से 300 रुपये तक की खरीदारी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में 100 रुपये से अधिक की खरीदारी पर शुल्क लगने से उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
इस फैसले का असर सीमावर्ती भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। कटिहार, अररिया, किशनगंज और अन्य सीमावर्ती जिलों के व्यापारी नेपाल के ग्राहकों पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। अब यदि नेपाली ग्राहक कम संख्या में खरीदारी करने आएंगे, तो स्थानीय व्यापारियों की आय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल सरकार का उद्देश्य भले ही राजस्व में वृद्धि करना और अवैध व्यापार पर रोक लगाना हो, लेकिन इस नीति का सबसे ज्यादा असर छोटे खरीदारों और निम्न आय वर्ग के लोगों पर पड़ेगा। बड़ी कंपनियां और बड़े व्यापारी इस तरह के नियमों से आसानी से निपट सकते हैं, लेकिन आम जनता के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
इसी के साथ नेपाल सरकार ने भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के संचालन को लेकर भी सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब किसी भी भारतीय वाहन को नेपाल में प्रवेश करने से पहले भंसार (कस्टम) की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
भंसार महाशुल्क ऐन 2071 के तहत लागू इन नियमों के अनुसार, बाइक या स्कूटर के लिए प्रतिदिन 100 रुपये, तीन पहिया वाहनों के लिए 400 रुपये और कार, जीप या वैन के लिए 600 रुपये प्रतिदिन शुल्क निर्धारित किया गया है। यह शुल्क चुकाने के बाद ही वाहन को नेपाल की सड़कों पर चलाने की अनुमति दी जाएगी।
इसके अलावा, किसी भी विदेशी वाहन को एक आर्थिक वर्ष में अधिकतम 30 दिनों तक ही नेपाल में संचालित करने की अनुमति होगी, चाहे यह अवधि लगातार हो या अलग-अलग हिस्सों में। यदि कोई वाहन निर्धारित समय सीमा से अधिक समय तक नेपाल में रहता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
नियमों के अनुसार, बाइक और स्कूटर पर प्रतिदिन 2000 रुपये तथा अन्य वाहनों पर 2500 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन जब्त करने तक की कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस फैसले के बाद सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों और व्यापारियों के बीच असंतोष की स्थिति देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकार को इस तरह के फैसले लेने से पहले आम जनता की समस्याओं और उनकी आर्थिक स्थिति पर विचार करना चाहिए था।
फिलहाल, नेपाल सरकार के इस नए नियम के लागू होने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार और आवागमन के स्वरूप में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर कितना व्यापक प्रभाव पड़ता है।

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