करके सीख रहे बच्चे: प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग से संवर रहा भविष्य

राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), पटना के निर्देशन में बिहार के सभी सरकारी मध्य विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक के बच्चों के लिए विज्ञान और गणित विषयों में “प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग” (PBL) आधारित शिक्षण प्रक्रिया लागू की गई है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य है – छात्रों में “करके सीखना” की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित कर उन्हें न केवल विषयवस्तु में दक्ष बनाना, बल्कि उनके नेतृत्व, समन्वय और आलोचनात्मक सोच जैसी जीवनोपयोगी क्षमताओं का भी विकास करना।

भागलपुर जिले के मध्य विद्यालय, जगदीशपुर में इस कार्यक्रम को प्रभावशाली ढंग से संचालित किया जा रहा है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक सह विज्ञान शिक्षक श्री आशुतोष चन्द्र मिश्र बताते हैं, “प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग में बच्चे समूह बनाकर कार्य करते हैं, जिससे उनमें सामूहिक संवाद, विचारों का आदान-प्रदान और नेतृत्व की भावना का विकास होता है। जब बच्चे स्वयं खोजकर, प्रयोग कर किसी विषय को समझते हैं, तो वह ज्ञान स्थायी हो जाता है।”

इस महीने के निर्धारित परियोजना विषयों की बात करें तो:

  • कक्षा 6 के बच्चों को “जैव विविधता” पर कार्य करने को कहा गया है। वे अपने आस-पास पाए जाने वाले विभिन्न पौधों और जीवों की सूची बनाकर उनका वर्गीकरण करना सीख रहे हैं।
  • कक्षा 7 के छात्र “सौर ऊर्जा एवं ऊष्मा” विषय पर काम कर रहे हैं, जिसमें वे सौर कुकर, ऊष्मा का स्थानांतरण आदि पर प्रायोगिक गतिविधियाँ कर रहे हैं।
  • कक्षा 8 के विद्यार्थी “सूक्ष्मजीवों के लाभ एवं हानि” विषय पर कार्य कर रहे हैं, जिसमें वे घर और वातावरण में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों की पहचान कर उनके जीवन में उपयोग या हानियों को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

इन सभी परियोजनाओं को 10 जुलाई तक पूर्ण किया जाना है। छात्रों को विषय से जुड़ी जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट तैयार करनी होती है, जिसे वे मौखिक और पोस्टर प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत भी करते हैं।

प्रधानाध्यापक श्री मिश्र का मानना है कि इस प्रकार की शिक्षण विधि से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे किताबों की सीमाओं से बाहर निकलकर अपने समुदाय में भी ज्ञान का प्रयोग करना सीखते हैं। इससे शिक्षा केवल परीक्षा उन्मुख न रहकर जीवन उपयोगी बनती है।

गौरतलब है कि शिक्षा विभाग की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है, जिसमें ‘सीखने के अनुभव को आनंददायक और व्यावहारिक बनाना’ प्रमुख उद्देश्य है। यदि इस दिशा में सभी विद्यालयों में नियमित निगरानी और शिक्षक प्रशिक्षण होता रहे, तो बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना जल्द ही साकार हो सकता है।

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