जगदीशपुर अंचल कार्यालय में दाखिल–खारिज प्रक्रिया में भारी अनियमितता, आवेदकों को उठानी पड़ रही भारी परेशानी

जगदीशपुर अंचल कार्यालय में दाखिल–खारिज (म्यूटेशन) प्रक्रिया इन दिनों पूरी तरह अव्यवस्थित और मनमानी का शिकार हो गई है। दाखिल–खारिज कराने पहुंचे आम आवेदकों को हल्का कर्मियों की लापरवाही और मनमानी के कारण गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।आवेदकों का कहना है कि जैसे ही आवेदन का टेम्प नंबर जारी होता है, उसे संबंधित को (अमीन/कानूनगो) के पास भेजा जाता है।

नियम के अनुसार कानूनगो एवं राजस्व कर्मचारी को आवेदक से मिलकर स्थलीय जांच करनी चाहिए, कागजात की सत्यता की पुष्टि करनी चाहिए, और यदि किसी प्रकार की कमी हो तो उसे आवेदक को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। इसी आधार पर ही आवेदन को ‘डिफेक्ट’ या ‘स्वीकृत’ किया जाना चाहिए।

लेकिन, आवेदकों का आरोप है कि जगदीशपुर अंचल में वास्तविक प्रक्रिया के ठीक उल्टा स्थिति है। अधिकांश हल्का कर्मचारी आवेदक से मिले बिना ही आवेदन को ‘डिफेक्ट’ में डाल देते हैं। वहीं जिन्हें दलालों के माध्यम से आवेदन भेजे जाते हैं, उन्हें बिना स्थलीय जांच और बिना अभिलेख सत्यापन के ही डिक्लेअर या स्वीकृत कर दिया जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि

बिना दलाल के एक भी आवेदन आगे नहीं बढ़ता,

बिना नजराना दिए कोई प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती,

और राजस्व कर्मचारी नियमों की अनदेखी कर सीधे उच्च पदाधिकारियों के स्तर पर ही फाइल को अग्रसारित कर देते हैं।लोगों का आरोप है कि इस पूरे तानाबाना में दलालों और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत शामिल है, जिससे साधारण आवेदक महीनों तक चक्कर काटता रहता है, लेकिन न्याय और सुविधा से वंचित रह जाता है।

अब देखना यह है कि अंचलाधिकारी (CO) एवं उच्च पदाधिकारियों की ओर से इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई की जाती है। क्या विभागीय जांच होगी? क्या दोषी राजस्व कर्मियों पर कार्रवाई होगी?आम जनता की अपेक्षा है कि दाखिल–खारिज प्रक्रिया को सरल किया जाए, दलालों की भूमिका समाप्त हो और राजस्व कर्मचारी नियम के अनुसार स्थलीय जांच करके ही निर्णय लें, ताकि लोगों को समय पर और निष्पक्ष तरीके से सेवा मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *