जहां चाह, वहां राह


जगदीशपुर मध्य विद्यालय में छत पर बनी पोषण वाटिका बनी प्रेरणा, पढ़ाई और पोषण दोनों को मिल रहा बढ़ावा

भागलपुर (जगदीशपुर)।
कहते हैं कि जहां सच्ची लगन और सकारात्मक सोच हो, वहां राह अपने आप निकल आती है। इस कहावत को साकार कर दिखाया है मध्य विद्यालय जगदीशपुर ने, जहां विद्यालय परिसर में खाली भूमि के अभाव के बावजूद स्कूल की छत पर ही पोषण वाटिका का निर्माण कर दिया गया है। यह अनूठी पहल न केवल बच्चों के पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अन्य विद्यालयों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बन गई है।

विद्यालय की इस पोषण वाटिका ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों में भी नवाचार और संकल्प के साथ बड़े कार्य किए जा सकते हैं। छत पर बनाई गई यह वाटिका आज विद्यालय के छात्रों के लिए सीखने, समझने और प्रयोग करने की एक जीवंत प्रयोगशाला बन चुकी है।

एक पथ, दो काज का सिद्धांत
विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष चन्द्र मिश्र ने बताया कि इस पोषण वाटिका का उद्देश्य केवल सब्जी उगाना नहीं था, बल्कि छत की सुरक्षा और बच्चों के शैक्षणिक विकास दोनों को एक साथ साधना था। उन्होंने कहा कि यह वाटिका “एक पथ, दो काज” का सटीक उदाहरण है। एक ओर यह छत के चारों ओर सुरक्षा घेरा का कार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर पौष्टिक सब्जियों और फूलों से सजी यह वाटिका बच्चों के लिए पोषण और शिक्षा का केंद्र बन गई है।
प्रधानाध्यापक के अनुसार, वर्तमान में वाटिका में पालक, मूली, आलू, टमाटर, धनिया के साथ-साथ कुछ मौसमी फूल लगाए गए हैं। बच्चों की सहभागिता से इन पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है, जिससे उनमें जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित हो रही है।

शिक्षण-अधिगम का जीवंत माध्यम
इस पोषण वाटिका की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि एक शिक्षण-अधिगम सामग्री के रूप में कार्य कर रही है। विज्ञान विषय से जुड़ी कई अवधारणाएं बच्चों को किताबों के पन्नों से निकालकर प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सिखाई जा रही हैं।
प्रधानाध्यापक आशुतोष चन्द्र मिश्र ने बताया कि सजीव और निर्जीव, पौधों की वृद्धि, पोषण, प्रकाश संश्लेषण, जल चक्र, फसल उत्पादन और प्रबंधन जैसे विषयों को बच्चे अब कक्षा से बाहर आकर वाटिका में देखकर और करके सीख रहे हैं। इससे बच्चों की समझ न केवल गहरी हो रही है, बल्कि उनमें विषय के प्रति रुचि भी बढ़ी है।

छात्राओं की जुबानी सीखने का अनुभव
वर्ग छह की छात्राएं तन्नु, प्रिया, ईसा और चांदनी ने बताया कि जनवरी माह में वे विज्ञान विषय में “सजीव” अध्याय पढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सजीवों के सभी लक्षणों को वे अब किताबों में पढ़ने के साथ-साथ पोषण वाटिका में प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ पा रही हैं। पौधों में वृद्धि, पत्तियों का रंग, फूल आना और फल लगना जैसे पहलुओं को देखकर पढ़ाई करना उन्हें अधिक रोचक लग रहा है।

वहीं वर्ग आठ की छात्राएं विद्या, संध्या, साजन, मानवी और दिव्या ने बताया कि विज्ञान विषय में फसल उत्पादन और प्रबंधन से जुड़े जो भी कार्य वे पढ़ रही हैं, उन्हें वे वाटिका में व्यावहारिक रूप से सीख रही हैं। बीज बोने से लेकर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और पौधों की देखभाल तक का अनुभव उन्हें वास्तविक जीवन से जोड़ रहा है।

ईको क्लब और बाल संसद की अहम भूमिका
विद्यालय की इस पहल को सफल बनाने में ईको क्लब और बाल संसद के सदस्यों की भूमिका भी सराहनीय रही है। छात्रों ने शिक्षकों के मार्गदर्शन में वाटिका की देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं संभाली है। पौधों को पानी देना, साफ-सफाई रखना और उनकी सुरक्षा करना बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।

इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण, सामूहिक कार्य, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन जैसे गुण विकसित हो रहे हैं। शिक्षक भी मानते हैं कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा
मध्य विद्यालय जगदीशपुर की यह पोषण वाटिका आज क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है। सीमित भूमि और संसाधनों के बावजूद छत पर वाटिका बनाकर विद्यालय ने यह संदेश दिया है कि इच्छाशक्ति हो तो हर समस्या का समाधान संभव है।
शिक्षाविदों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य विद्यालयों में भी अपनाया जाए, तो बच्चों के पोषण, पर्यावरण संरक्षण और व्यावहारिक शिक्षा को एक साथ बढ़ावा दिया जा सकता है।

शिक्षा और प्रकृति का सुंदर संगम
कुल मिलाकर, मध्य विद्यालय जगदीशपुर में छत पर बनी यह पोषण वाटिका शिक्षा और प्रकृति के सुंदर संगम का उदाहरण है। यह पहल न केवल बच्चों के लिए सीखने का एक नया आयाम खोल रही है, बल्कि उन्हें प्रकृति से जोड़कर जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

“जहां चाह, वहां राह” की कहावत को चरितार्थ करती यह पोषण वाटिका आने वाले समय में निश्चित रूप से अन्य विद्यालयों के लिए मार्गदर्शक बनेगी।

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