भागलपुर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस, आर-पार की लड़ाई का आह्वान

भागलपुर, 6 फरवरी 2026।
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड को मजदूर विरोधी बताते हुए भागलपुर में शुक्रवार को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने साझा रूप से विरोध का ऐलान किया। स्थानीय कजवलीचक स्थित सेवा कार्यालय में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि ये लेबर कोड मजदूरों की कानूनी सुरक्षा को समाप्त कर उन्हें पूंजीपतियों का गुलाम बना देंगे। मजदूर वर्ग के अस्तित्व को बचाने के लिए अब आर-पार की लड़ाई जरूरी हो गई है।
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, सीटू के जिला सचिव दशरथ प्रसाद, एआईयूटीयूसी के जिला संयोजक दीपक कुमार, इंटक के जिला अध्यक्ष ई. रवि कुमार, एटक के जिला महासचिव डॉ. सुधीर शर्मा तथा सेवा की संगठक पूनम केशरी ने एक स्वर में केंद्र सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की।
नेताओं ने कहा कि अब तक मजदूरों को न्यूनतम सुरक्षा और अधिकार देने वाले 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर बनाए गए चार लेबर कोड मजदूरों को सौ-डेढ़ सौ साल पीछे धकेल देंगे। इन कोडों के लागू होने से श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग मजदूर की परिभाषा से ही बाहर हो जाएगा, जिससे उनका अस्तित्व गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।
उन्होंने कहा कि ये सभी श्रम कानून औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय जनता और मजदूर वर्ग के लंबे संघर्षों एवं कुर्बानियों का परिणाम थे। ऐसे में इन कानूनों को खत्म कर लेबर कोड लाना संविधान पर सीधा हमला है। यह मोदी सरकार द्वारा संविधान को कमजोर करने की साजिश का ही हिस्सा है। देश का मजदूर आंदोलन शुरू से ही इन कोडों का विरोध करता आ रहा है और इन्हें पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहा है।
ट्रेड यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि लेबर कोड औद्योगिक घरानों और बड़े कॉरपोरेट मालिकों की मांग पर लाए गए हैं, जिन्हें आरएसएस-भाजपा के मजदूर संगठन बीएमएस का समर्थन प्राप्त है। सरकार के तथाकथित “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को आगे बढ़ाने के लिए मजदूरों का शोषण कर पूंजीपतियों के मुनाफे को सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही श्रम शक्ति नीति 2025 के जरिए श्रम को अधिकार की बजाय “धर्म” के रूप में परिभाषित किया जा रहा है, जो मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने की दिशा में बड़ा कदम है।
नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार 21 नवंबर 2025 को लेबर कोड को अधिसूचित कर चुकी है और इसके नियम बनाए जा रहे हैं। 1 अप्रैल 2026 से चारों लेबर कोड लागू करने की पूरी तैयारी है। सरकार इन कोडों को मजदूर हितैषी बताने के लिए बड़े पैमाने पर भ्रामक प्रचार कर रही है।
संवाददाता सम्मेलन में किसानों और ग्रामीण मजदूरों के मुद्दे भी उठाए गए। नेताओं ने कहा कि किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देने से इनकार करने वाली सरकार ने अमेरिका के साथ हुए समझौते में भारतीय बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोल दिया है, जो देश के किसानों के साथ धोखा है। इससे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और किसानों का संकट और गहराएगा।
मनरेगा को समाप्त कर “वीबी-ग्रामजी कानून 2025” लाने को लेकर भी यूनियन नेताओं ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि जब देश गंभीर बेरोजगारी से जूझ रहा है, ऐसे समय में रोजगार गारंटी खत्म कर सस्ते श्रम की फौज तैयार की जा रही है। इससे मजदूरों का पलायन और बढ़ेगा।
इन तमाम नीतियों के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है, जिसे संयुक्त किसान मोर्चा का भी समर्थन प्राप्त है। नेताओं ने मजदूर वर्ग से अपील की कि वे अपने अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष तेज करें और इस हड़ताल को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाएं।
संवाददाता सम्मेलन में सिकंदर तांती, संजय कुमार राय, मनोहर मंडल, बेबी देवी, मनोहर शर्मा सहित कई मजदूर नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
