सुपोषण के रहस्यों से परिचित हुए प्राथमिक विद्यालय गोहारियो के विद्यार्थी

मुख्यमंत्री सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के तहत ‘कुपोषण से बचाव’ पर विशेष जागरूकता आयोजन
प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत स्थित प्राथमिक विद्यालय गोहारियो में शनिवार को मुख्यमंत्री सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय था — ‘कुपोषण से बचाव’। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं को सुपोषण के महत्व, संतुलित आहार की आवश्यकता तथा जंक फूड से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें सही खान-पान की आदतों के बारे में प्रेरित करना था, ताकि वे कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से बच सकें। विद्यालय परिसर में आयोजित इस गतिविधि में शिक्षकों ने सरल और रोचक तरीके से बच्चों को पोषण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों से अवगत कराया।
कुपोषण : एक गंभीर सामाजिक चुनौती
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बताया गया कि कुपोषण केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और मानसिक विकास में बाधा उत्पन्न करने वाली गंभीर स्थिति है। हर वर्ष लाखों बच्चे और लोग कुपोषण का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनके शारीरिक विकास के साथ-साथ उनकी पढ़ाई और मानसिक क्षमता भी प्रभावित होती है।
शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि कुपोषण तब होता है जब शरीर को आवश्यक पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन, खनिज और ऊर्जा पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते। इससे बच्चों में कमजोरी, बार-बार बीमार पड़ना, पढ़ाई में ध्यान की कमी और विकास में रुकावट जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
गतिविधियों के माध्यम से दी गई जानकारी
कार्यक्रम को केवल भाषण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से कुपोषण और सुपोषण के बीच का अंतर समझाया गया।
चित्रों, उदाहरणों और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से बच्चों को बताया गया कि—
जंक फूड जैसे चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, नूडल्स और अत्यधिक तले हुए खाद्य पदार्थ शरीर के लिए हानिकारक हैं।
इनसे शरीर को आवश्यक पोषण नहीं मिलता, बल्कि मोटापा और बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
इसके स्थान पर घर का बना संतुलित भोजन स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होता है।
संतुलित आहार का महत्व
कार्यक्रम में बच्चों को सुपोषण के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि रोज़मर्रा के भोजन में निम्न चीज़ों को शामिल करना बेहद जरूरी है —
दूध और दुग्ध उत्पाद
अंडा
ताजे फल
हरी पत्तेदार सब्जियां
दालें
अनाज
शिक्षकों ने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपने भोजन में विविधता रखें और केवल स्वाद के बजाय स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
प्रधान शिक्षक का प्रेरक संदेश
विद्यालय के प्रधान शिक्षक श्री श्रवण रजक ने इस अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि कुपोषण भी एक प्रकार की आपदा है, जो चुपचाप बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा—
“स्वस्थ और सुपोषित बच्चा ही एक मजबूत समाज की नींव रख सकता है। जब बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होगा तभी वह पूरे मनोयोग से शिक्षा ग्रहण कर सकेगा। इसलिए कुपोषण से मुक्ति बेहद आवश्यक है।”
उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे जंक फूड से दूरी बनाएं और घर का पौष्टिक भोजन ग्रहण करें।
बच्चों में दिखा उत्साह
कार्यक्रम के दौरान बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछे और सुपोषण से जुड़े विषयों को समझने में रुचि दिखाई।
कुछ बच्चों ने यह भी साझा किया कि वे अब अपने दैनिक भोजन में फल और सब्जियां शामिल करने का प्रयास करेंगे।
शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक मो. राशिद, मो. इमरोज़ उद्दीन, मो. रमतुल्लाह, कुमारी निशु, मो. इमतियाज ने बच्चों को पोषण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
बाल प्रेरक जिशान, राबिया, सौरभ और नासरीन ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
सभी शिक्षकों ने बच्चों को यह संदेश दिया कि अच्छा स्वास्थ्य ही बेहतर भविष्य की कुंजी है।
जागरूकता ही बचाव का उपाय
कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि कुपोषण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है। यदि बचपन से ही बच्चों को सही खान-पान की आदतें सिखाई जाएं, तो आने वाली पीढ़ी को कुपोषण से बचाया जा सकता है।
विद्यालय परिवार ने इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित करने का संकल्प लिया, ताकि बच्चों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता निरंतर बनी रहे।
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और उन्होंने सुपोषण के महत्व को समझते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
