बा की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जगदीशपुर में प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित

जगदीशपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की धर्मपत्नी एवं स्वतंत्रता संग्राम की अग्रणी सहयोगी कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में एक सादगीपूर्ण लेकिन भावनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विद्यालय परिवार, शिक्षिकाएँ, वार्डेन एवं छात्राओं ने मिलकर बा के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत बा के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। वातावरण पूरी तरह श्रद्धामय हो उठा जब छात्राओं ने एक स्वर में बापू के प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम” तथा “वैष्णव जन तो तेने कहिए” का सामूहिक गान प्रस्तुत किया। भजनों की मधुर ध्वनि ने विद्यालय परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया और उपस्थित सभी लोगों को गांधीवादी मूल्यों की याद दिलाई।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष चन्द्र मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि कस्तूरबा गांधी केवल महात्मा गांधी की पत्नी ही नहीं थीं, बल्कि वे स्वतंत्रता आंदोलन की एक सशक्त और प्रेरणादायी स्तंभ थीं। उन्होंने कहा कि बा का जीवन सादगी, सहनशीलता, दृढ़ निश्चय और कर्तव्यनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है। वे एक ऐसी महिला थीं जिन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा, त्याग और राष्ट्रहित के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने आगे कहा कि बा ने हर परिस्थिति में गांधीजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया और स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा दी। उनका जीवन यह संदेश देता है कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति भी है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे बा के जीवन से प्रेरणा लें और आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक जिम्मेदारी के मार्ग पर आगे बढ़ें।
कार्यक्रम के दौरान वार्डेन सपना कुमारी के नेतृत्व में छात्राओं ने सामूहिक संकल्प लिया। सभी बच्चियों ने यह प्रतिज्ञा की कि वे आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ेंगी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएँगी। उन्होंने आत्मरक्षा के महत्व को समझते हुए स्वयं को सशक्त बनाने का संकल्प लिया ताकि वे किसी भी प्रकार की सामाजिक बाधाओं का सामना कर सकें।
छात्राओं ने यह भी संकल्प लिया कि वे बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता फैलाएँगी तथा समाज से बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के लिए प्रयासरत रहेंगी। साथ ही उन्होंने बालिका हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक संकट के विरुद्ध आवाज उठाने और समाज में समानता एवं सम्मान की भावना स्थापित करने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षिका फूल कुमारी ने कहा कि आज के समय में बा के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज को सशक्त बनाना है तो बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना अनिवार्य है। शिक्षा ही वह माध्यम है जो महिलाओं को आत्मसम्मान और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
विद्यालय की छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बा का जीवन उन्हें संघर्ष में भी धैर्य बनाए रखने और अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में समाज सेवा, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में योगदान देना चाहती हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी शिक्षिकाओं एवं कर्मियों ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाएँ और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में आगे बढ़ें। इस अवसर पर वार्डेन सह शिक्षिका सपना कुमारी, शिक्षिका फूल कुमारी, कर्मी राजकिशोर, वृंदा, रिंकू, सुशीला सहित विद्यालय की सभी छात्राएँ उपस्थित रहीं।
पूरे कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, प्रेरणा और संकल्प से ओतप्रोत रहा। बा की पुण्यतिथि के इस आयोजन ने न केवल छात्राओं को इतिहास से जोड़ने का कार्य किया, बल्कि उन्हें आत्मबल, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को भी समझाया।
इस प्रकार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, जगदीशपुर में आयोजित यह कार्यक्रम छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और बा के जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में सफल रहा।
