राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की समीक्षा बैठक में लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन पर जोर

पटना, 07 मार्च।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा शनिवार को पुराना सचिवालय, पटना स्थित विभागीय कार्यालय कक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पटना जिले के सभी अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अंचलाधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य भूमि से संबंधित लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा करना तथा उनके त्वरित निष्पादन को सुनिश्चित करना था। बैठक की अध्यक्षता विभाग के प्रधान सचिव श्री सी. के. अनिल ने की।

बैठक के दौरान भूमि प्रशासन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें परिमार्जन प्लस के अंतर्गत लंबित आवेदनों, दाखिल-खारिज तथा उससे संबंधित अपील वादों, बिहार भूमि विवाद निवारण अधिनियम 2009 के तहत लंबित मामलों, लगान की अद्यतन स्थिति, सैरात बंदोबस्ती और राजस्व पदाधिकारियों के क्षेत्राधिकार में लंबित मामलों के निष्पादन की स्थिति पर गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि आम जनता से जुड़े इन मामलों का शीघ्र और पारदर्शी तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।
प्रधान सचिव श्री सी. के. अनिल ने बैठक में कहा कि भूमि से जुड़े मामलों का समय पर निष्पादन सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि दाखिल-खारिज और भूमि विवाद जैसे मामलों के कारण अक्सर आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इन मामलों का निपटारा तय समयसीमा के भीतर करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबित मामलों को कम करने के लिए सभी राजस्व पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में नियमित रूप से समीक्षा करें और आवश्यकतानुसार विशेष अभियान चलाकर मामलों का समाधान करें।

बैठक में परिमार्जन प्लस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आवेदनों की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध तरीके से सत्यापन कर उनका निष्पादन किया जाए। यह भी कहा गया कि तकनीक के माध्यम से राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है, इसलिए डिजिटल प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।
दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान पाया गया कि कई जगहों पर अभी भी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। इस पर प्रधान सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निपटारा किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आवेदनों के निष्पादन में अनावश्यक देरी न हो और आवेदकों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में बिहार भूमि विवाद निवारण अधिनियम 2009 के तहत दर्ज मामलों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि भूमि विवाद से जुड़े मामलों का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत त्वरित रूप से किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनी रहे। प्रधान सचिव ने कहा कि भूमि विवाद अक्सर सामाजिक तनाव का कारण बनते हैं, इसलिए इन मामलों का समय पर निपटारा बेहद जरूरी है।
लगान की अद्यतन स्थिति पर भी बैठक में चर्चा हुई। अधिकारियों से कहा गया कि राजस्व वसूली की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि लगान से संबंधित रिकॉर्ड पूरी तरह अद्यतन रहें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।

सैरात बंदोबस्ती से जुड़े मामलों पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सैरात बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। इससे न केवल राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक के दौरान राजस्व पदाधिकारियों के क्षेत्र में लंबित विभिन्न मामलों की स्थिति पर भी विस्तृत समीक्षा की गई। प्रधान सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से कैंप लगाकर लोगों की समस्याओं को सुनें और उनका समाधान करें। इससे न केवल लंबित मामलों की संख्या कम होगी बल्कि आम लोगों का भरोसा भी प्रशासन पर मजबूत होगा।

बैठक में यह भी कहा गया कि भूमि प्रशासन से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत जरूरी है। इसके लिए सभी अधिकारियों को अपने कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करनी होगी और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। प्रधान सचिव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि आम जनता को भूमि से संबंधित सेवाएं सरल और सुगम तरीके से उपलब्ध हों।
इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री गोपाल मीणा और सचिव श्री जय सिंह ने भी अपने विचार रखते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए समन्वय और सतर्कता बेहद जरूरी है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार और समयबद्ध तरीके से पूरी हों।

बैठक में भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक श्री सुहर्ष भगत, अपर सचिव श्री आजीव वत्सराज और उप निदेशक श्रीमती मोना झा समेत कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर पर विभागीय कार्यों की प्रगति की जानकारी दी और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की।
बैठक के अंत में प्रधान सचिव ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लंबित मामलों के निष्पादन को प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि आम जनता को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर मिले। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि भूमि प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाए, ताकि लोगों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की इस समीक्षा बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि भूमि से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आएगी और आम जनता को राहत मिलेगी। वहीं विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद अब यह देखना होगा कि जिला और अंचल स्तर पर अधिकारी इन निर्देशों को किस तरह लागू करते हैं और लंबित मामलों के निष्पादन में कितनी प्रगति होती है।

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