यात्री शेड निर्माण में अनियमितता की जांच की मांग को लेकर मानवाधिकार संगठन ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

भागलपुर: जिले के नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत इस्माइलपुर प्रखंड में जिला परिषद की ओर से बनाए गए यात्री शेड के निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन भारत ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। संगठन के मीडिया प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव विभूति सिंह ने इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से बनाए गए यात्री शेड में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है, जिससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने कहा कि बीते पांच वर्षों से राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन भारत सामाजिक और जनहित के मुद्दों को उठाते हुए आम लोगों की आवाज को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का काम कर रहा है। संगठन गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की मदद करने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में संगठन को इस्माइलपुर प्रखंड क्षेत्र में जिला परिषद के माध्यम से बनाए गए यात्री शेड के निर्माण में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

संगठन के राष्ट्रीय सचिव विभूति सिंह ने अपने ज्ञापन में बताया कि इस्माइलपुर प्रखंड के विभिन्न स्थानों पर यात्रियों की सुविधा के लिए जिला परिषद द्वारा यात्री शेड का निर्माण कराया गया था। इन शेडों के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया और कार्य में लापरवाही बरती गई।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर बने यात्री शेडों की हालत कुछ ही समय में जर्जर होने लगी है। कहीं छत में दरारें दिख रही हैं तो कहीं प्लास्टर उखड़ने लगा है। कुछ जगहों पर लोहे के ढांचे में भी कमजोरी नजर आ रही है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते इसकी जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस उद्देश्य से यात्री शेड का निर्माण कराया गया था, वह उद्देश्य भी पूरा होता नहीं दिख रहा है। यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए बनाए गए इन शेडों की हालत देखकर लोग निराश हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर काम का लाभ आम लोगों को सही तरीके से नहीं मिल रहा है।
विभूति सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस्माइलपुर प्रखंड में जिला परिषद के माध्यम से बनाए गए सभी यात्री शेडों की तकनीकी जांच कराई जाए। इसके लिए संबंधित विभाग के अभियंताओं और स्वतंत्र जांच टीम की मदद ली जाए ताकि निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यदि योजनाओं के क्रियान्वयन में ही गड़बड़ी हो जाए तो इससे जनता का विश्वास कमजोर होता है। इसलिए आवश्यक है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच सुनिश्चित करे।

संगठन ने यह भी कहा कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगा और जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों और संबंधित विभागों को भी अवगत कराएगा। संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि जनहित में सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई जगह बने यात्री शेड पहले ही खराब हालत में पहुंच गए हैं, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई। ग्रामीणों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य सही तरीके से किया गया होता तो इतनी जल्दी इन शेडों की हालत खराब नहीं होती।
ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। लोगों का कहना है कि सरकारी धन जनता के टैक्स से आता है, इसलिए उसका सही उपयोग होना बेहद जरूरी है।

वहीं जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को किस तरह से लेता है और क्या वाकई में जांच की प्रक्रिया शुरू की जाती है या नहीं। यदि जांच होती है तो इससे न केवल मामले की सच्चाई सामने आएगी बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सकेगी।

फिलहाल संगठन द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद इस्माइलपुर प्रखंड में बने यात्री शेड के निर्माण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस मामले में जांच शुरू करता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

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