स्कूल भवन के अभाव में बाधित हो रही बच्चों की पढ़ाई, एक कमरे में कई कक्षाओं का संचालन

जगदीशपुर के कोयरी टोला हबीबपुर स्थित विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी, प्रधानाध्यापिका ने प्रशासन से लगाई गुहार

जगदीशपुर, भागलपुर। शिक्षा को लेकर सरकार लगातार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कई सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति को उजागर कर रही है। भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड अंतर्गत हबीबपुर पंचायत के कोयरी टोला स्थित मध्य विद्यालय एवं उच्च विद्यालय में भवन की भारी कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। विद्यालय में पर्याप्त कमरों का अभाव होने से छात्र-छात्राओं को कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
विद्यालय की स्थिति ऐसी है कि कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए मात्र दो कमरे उपलब्ध हैं, जबकि कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई भी केवल दो कमरों में संचालित हो रही है। ऐसे में एक ही कमरे में कई कक्षाओं को बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ रही है, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों का कहना है कि शोर-शराबे और जगह की कमी के कारण पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका वीणा तिवारी ने बताया कि भवन के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में पर्याप्त कमरे नहीं होने से पठन-पाठन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO), जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) तथा जिलाधिकारी (DM) को लिखित आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी विद्यालय भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।
प्रधानाध्यापिका ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की बात करती है, लेकिन जब तक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक शिक्षा का स्तर बेहतर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन कमरों की कमी के कारण उन्हें उचित माहौल नहीं मिल पा रहा है। बरसात और गर्मी के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयरी टोला क्षेत्र में यह विद्यालय बच्चों की शिक्षा का मुख्य केंद्र है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां पढ़ने आते हैं। लेकिन भवन नहीं होने के कारण बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार बच्चों को खुले स्थान पर भी बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है। अभिभावकों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि अगर जल्द भवन निर्माण नहीं हुआ तो बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ेगा।
विद्यालय की समस्या को लेकर मानवाधिकार संगठन के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। मानवाधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमित कुमार, राधिका खांडलवाला, आशुतोष कुमार, कैलाश मंडल, सुरेश प्रसाद सिंह, अमर सिंह, कार्तिक कुमार सहित अन्य सदस्यों ने विद्यालय पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। टीम ने विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया और बच्चों तथा शिक्षकों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना।
मानवाधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमित कुमार ने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि विद्यालय में भवन की कमी गंभीर समस्या है और इसे जल्द दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संगठन इस मामले को संबंधित अधिकारियों के समक्ष मजबूती से उठाएगा और जल्द विद्यालय भवन निर्माण कराने का प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे उचित वातावरण में पढ़ाई नहीं कर पाएंगे तो उनके शैक्षणिक विकास पर असर पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करे। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तभी समाज और देश का विकास संभव है।
विद्यालय के शिक्षकों ने भी बताया कि कमरों की कमी के कारण पढ़ाई संचालित करने में काफी कठिनाई होती है। कई बार अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों को एक साथ बैठाना पड़ता है, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है। शिक्षक चाहते हैं कि जल्द से जल्द विद्यालय में नए भवन का निर्माण कराया जाए ताकि बच्चों को बेहतर सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से विद्यालय भवन निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए विद्यालय भवन निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाए।
विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं ने भी उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द होगा और उन्हें बेहतर वातावरण में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। फिलहाल विद्यालय में भवन की कमी शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है और बच्चे संसाधनों के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
