उर्दू मध्य विद्यालय सनहौली बालक में ‘बाल संसद’ का गठन, अल शिफा बनीं प्रधानमंत्री

लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए छात्रों ने चुनी अपनी सरकार, बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने की पहल

जगदीशपुर, भागलपुर। शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को लोकतंत्र, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने के उद्देश्य से सोमवार को जगदीशपुर प्रखंड अंतर्गत उर्दू मध्य विद्यालय सनहौली बालक में ‘बाल संसद’ का गठन किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत मतदान कर अपने प्रतिनिधियों का चयन किया। चुनाव प्रक्रिया को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखा गया और पूरे विद्यालय का माहौल लोकतांत्रिक रंग में रंगा नजर आया।
कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशफाक आलम के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान बच्चों को लोकतंत्र की मूल भावना, चुनाव प्रक्रिया और जिम्मेदार नागरिक बनने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रधानाध्यापक ने कहा कि बाल संसद बच्चों के अंदर नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम है। इससे बच्चे भविष्य में बेहतर नागरिक बन सकेंगे।
विद्यालय में बाल संसद गठन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार छात्रों के बीच मतदान कराया गया। मतदान के बाद मतगणना की गई और परिणाम घोषित किए गए। चुनाव परिणाम के अनुसार कक्षा 8 की छात्रा अल शिफा को विद्यालय का प्रधानमंत्री चुना गया। वहीं कक्षा 6 के छात्र अब्दुलअज़ीज़ को उप-प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। परिणाम की घोषणा होते ही छात्र-छात्राओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपने नए प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
नई कैबिनेट में विभिन्न विभागों के लिए मंत्रियों और उप-मंत्रियों का भी चयन किया गया। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी फातिमा तबारक को मंत्री और सोमैया को उप-मंत्री के रूप में दी गई। स्वास्थ्य विभाग में अब्दुल रहमान मंत्री तथा तायफा उप-मंत्री चुनी गईं। पुस्तकालय विभाग की जिम्मेदारी सना और चांदनी को सौंपी गई। खेल विभाग में मोहिबुल्लाह मंत्री तथा आलिया उप-मंत्री बनाई गईं। सांस्कृतिक विभाग की कमान उम्मे हानि और आफिया को मिली। वहीं जल एवं स्वच्छता विभाग में खुशहाल को मंत्री तथा शोएब को उप-मंत्री चुना गया।
प्रधानाध्यापक अशफाक आलम ने सभी नवनिर्वाचित बाल मंत्रियों को शपथ दिलाई। उन्होंने बच्चों को अपने-अपने विभागों की जिम्मेदारियों को ईमानदारी और सक्रियता के साथ निभाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बाल संसद केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह बच्चों को विद्यालय प्रबंधन और अनुशासन में भागीदारी का अवसर प्रदान करता है। इससे छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान और सामाजिक समझ भी मिलनी चाहिए। बाल संसद जैसी गतिविधियां बच्चों को लोकतंत्र की कार्यप्रणाली समझने और समाज में अपनी भूमिका को पहचानने में मदद करती हैं। विद्यालय में इस प्रकार की गतिविधियों से बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित होती है और वे सामूहिक निर्णय लेने की कला सीखते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षकों ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया। शिक्षक प्रमोद सिंह, मुदब्बीर हुसैन, कमाल अनवर, करुणा पंडित, कुमारी प्रियंका और बेबी कुमारी ने चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं निशा कुमारी, दिव्या राय, नीतू कुमारी, सरिता कुमारी और सद्दाम हुसैन का भी विशेष सहयोग रहा। शिक्षकों ने बच्चों को मतदान प्रक्रिया, अनुशासन और जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से समझाया।
विद्यालय परिसर में पूरे दिन उत्सव जैसा माहौल बना रहा। छात्र-छात्राएं अपने पसंदीदा उम्मीदवारों के समर्थन में उत्साह दिखाते नजर आए। मतदान के बाद बच्चों में परिणाम जानने की उत्सुकता भी देखने को मिली। जैसे ही परिणाम घोषित किए गए, विजयी उम्मीदवारों के समर्थकों ने खुशी जाहिर की। कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को लोकतंत्र और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित बाल संसद विद्यालय के अनुशासन, स्वच्छता, शैक्षणिक गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बेहतर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएगी। साथ ही बच्चों के बीच आपसी सहयोग, नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करेगी।

इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक मौजूद रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
