मनरेगा कार्यों में अनियमितता का आरोप, मजदूरों की जगह दूसरे लोगों से काम कराने का सवाल

जगदीशपुर। जगदीशपुर प्रखंड की करीब नौ पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत खुदाई, सुरक्षा बांध निर्माण, मिट्टी भराई,डार की खुदाई समेत कई तरह के कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा के कार्यों में पारदर्शिता बरतने के लिए जॉब कार्डधारी मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और मस्टर रोल का सही तरीके से सत्यापन जरूरी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन मजदूरों के नाम पर मनरेगा में जॉब कार्ड दर्ज हैं, उनमें से कई वास्तविक मजदूर कार्यस्थल पर काम नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि उनके स्थान पर दूसरे लोगों से काम कराया जा रहा है और बाद में जॉब कार्डधारी मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच कराने की मांग की है।
मस्टर रोल और मजदूरों की उपस्थिति की जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मनरेगा के उद्देश्य के विपरीत होगा। मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है। ऐसे में किसी दूसरे व्यक्ति से काम कराने और जॉब कार्डधारी के नाम पर उपस्थिति दर्ज करने की शिकायत गंभीर मामला हो सकता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी संबंधित पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यों की स्थल पर जांच कराई जाए। जांच के दौरान कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों की पहचान, जॉब कार्ड, मस्टर रोल और मजदूरी भुगतान का मिलान कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
रोजगार सेवक और कनीय अभियंता की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों की निगरानी करने वाले संबंधित रोजगार सेवक और कनीय अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कार्यस्थलों की निगरानी और मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों ने कहा कि मनरेगा कार्यों की जमीनी हकीकत सरकारी रिकॉर्ड से अलग होने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने इसे व्यवस्था में नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप बताते हुए जांच की मांग की।
पंचायतवार जांच कराने की मांग
ग्रामीणों ने प्रखंड प्रशासन और संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से पंचायतवार मनरेगा कार्यों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही कार्यस्थल पर मजदूरों की वास्तविक संख्या, मस्टर रोल में दर्ज उपस्थिति, जॉब कार्ड और मजदूरी भुगतान का मिलान कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मनरेगा कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं। प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
