कटिहार में जनगणना 2027 की डिजिटल शुरुआत, 17 अप्रैल से स्वगणना पोर्टल आम लोगों के लिए खुला

रिपोर्ट – मनोज कुमार, कटिहार/बिहार
बिहार के कटिहार जिले में भारत की आगामी जनगणना 2027 को लेकर एक नई पहल की शुरुआत हो चुकी है। इस बार जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुलभ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के उद्देश्य से ‘स्वगणना’ (Self Enumeration) की शुरुआत की गई है। इसी क्रम में कटिहार समाहरणालय में जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें इस नई व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि जनगणना 2027 के पहले चरण के रूप में स्वगणना की प्रक्रिया 17 अप्रैल 2026 से शुरू कर दी गई है। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस डिजिटल अभियान का हिस्सा बनें और अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्वयं अपनी जनगणना करें। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि नागरिकों को अपनी जानकारी खुद दर्ज करने का अधिकार भी देगी।
जिलाधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि स्वगणना प्रक्रिया को लागू करने से पहले 16 अप्रैल को कटिहार जिले में इसका ट्रायल रन किया गया था। इस ट्रायल में जिले के कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इसमें विधायक, विधान परिषद सदस्य, महापौर, उपमहापौर, नगर आयुक्त सहित कई अन्य अधिकारी शामिल हुए। इस ट्रायल के माध्यम से पोर्टल की कार्यप्रणाली को परखा गया और संभावित समस्याओं का समाधान किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि इस पहल से पहले राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देशानुसार एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का आयोजन किया गया था, जिसमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव और जनगणना निदेशालय के अधिकारियों ने सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस बैठक में स्वगणना की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और इसके लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
जिलाधिकारी ने बताया कि भारत सरकार ने पहली बार नागरिकों को यह सुविधा दी है कि वे अपनी जनगणना स्वयं कर सकें। इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर से लॉग-इन कर अपनी जनगणना संबंधी जानकारी दर्ज कर सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल है और इसे सरल एवं उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया गया है, ताकि हर वर्ग के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें।
उन्होंने बताया कि स्वगणना पोर्टल को 17 अप्रैल 2026 को प्रायोगिक तौर पर सुबह 5 बजे से दोपहर तक खोला गया था। इस दौरान जिले के 233 लोगों ने सफलतापूर्वक अपनी जनगणना पूरी की। यह संख्या इस बात का संकेत है कि लोग इस नई प्रणाली को अपनाने के लिए तैयार हैं और इसमें उनकी रुचि भी बढ़ रही है।
अब यह पोर्टल आम जनता के लिए विधिवत रूप से खोल दिया गया है और नागरिकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे समय रहते अपनी जानकारी इसमें दर्ज करें। जिलाधिकारी ने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल सरकार के लिए आंकड़े जुटाने में सहायक होगी, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में भी मददगार साबित होगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिलाधिकारी ने जिले के सभी विभागों के कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिया कि वे अपने अधीन कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की स्वगणना सुनिश्चित करें। इसके अलावा, उन्होंने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करें और उन्हें इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।
जिलाधिकारी ने बताया कि स्वगणना अभियान को सफल बनाने के लिए जिला स्तर पर 24 वार्ड पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों को इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी देंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तकनीकी सहायता भी प्रदान करेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना के आंकड़े किसी भी देश की विकास योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विभिन्न योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन करती है। ऐसे में यदि नागरिक स्वयं अपनी सही और सटीक जानकारी देंगे, तो योजनाएं अधिक प्रभावी और लक्षित हो सकेंगी।
डिजिटल स्वगणना की यह पहल भारत में जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होगी। साथ ही, यह नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और इसे समय के अनुरूप एक सकारात्मक कदम बताया है। कई लोगों का मानना है कि इससे जनगणना प्रक्रिया अधिक आसान और तेज हो जाएगी। हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीकी जानकारी की कमी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सहायता की व्यवस्था की जानी चाहिए।
कुल मिलाकर, कटिहार जिले में जनगणना 2027 की स्वगणना प्रक्रिया की शुरुआत एक नई उम्मीद और बदलाव का संकेत दे रही है। प्रशासन और आम जनता के सहयोग से यह अभियान निश्चित रूप से सफल हो सकता है और भविष्य की योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है।
