मनिहारी–साहिबगंज गंगा ब्रिज निर्माण में आई तेजी, 70-80% काम पूरा


करीब 1900 करोड़ की लागत से बन रहा पुल, 2028-29 तक पूरा होने की उम्मीद; चार राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ
कटिहार, संवाददाता (मनोज कुमार):
कटिहार जिले के मनिहारी से झारखंड के साहिबगंज को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित गंगा ब्रिज के निर्माण कार्य में अब उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। वर्षों से प्रतीक्षित इस महत्वपूर्ण परियोजना का लगभग 70 से 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। निर्माण एजेंसियों और प्रशासन की मानें तो यदि कार्य की गति इसी तरह बनी रही, तो वर्ष 2028 के अंत तक या 2029 की शुरुआत तक यह पुल बनकर तैयार हो सकता है।
करीब 1900 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह गंगा ब्रिज देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसे भारत का तीसरा प्रमुख गंगा पुल बताया जा रहा है, जो पूर्वी भारत के कई हिस्सों को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ने का कार्य करेगा। पुल के बन जाने से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों के बीच आवागमन पहले की तुलना में काफी आसान और तेज हो जाएगा।
वर्तमान में पुल के पिलर, सुपर स्ट्रक्चर और एप्रोच रोड से जुड़े अधिकांश कार्य तेजी से चल रहे हैं। इंजीनियरों के अनुसार मुख्य ढांचे का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है, जबकि शेष कार्यों में फिनिशिंग, कनेक्टिविटी और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
हालांकि, निर्माण कार्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर है। हर वर्ष मानसून के दौरान गंगा में जलस्तर बढ़ने के कारण निर्माण कार्य की गति धीमी पड़ जाती है। इस वर्ष भी अनुमान है कि जैसे ही जलस्तर बढ़ेगा, कार्य को सुरक्षा कारणों से धीरे-धीरे करना पड़ेगा। इसके बावजूद निर्माण एजेंसियां समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पुल का निर्माण क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। वर्तमान में मनिहारी से साहिबगंज के बीच आवागमन के लिए नाव या लंबा सड़क मार्ग ही एकमात्र विकल्प है, जिससे समय और संसाधनों की काफी बर्बादी होती है। पुल के तैयार हो जाने के बाद न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
व्यापारियों का कहना है कि इस पुल के माध्यम से बिहार और झारखंड के बीच माल ढुलाई में आसानी होगी। साथ ही पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से भी बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी। इससे कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामग्री और अन्य वस्तुओं के परिवहन में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय बाजारों को भी लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुल केवल एक यातायात साधन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास का नया द्वार साबित होगा। इससे पर्यटन, व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कार्य को तेजी से पूरा करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पुल निर्माण से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि गंगा नदी की भौगोलिक स्थिति और जलधारा के दबाव को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पुल की मजबूती और दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
स्थानीय जनता में इस परियोजना को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से जिस पुल का इंतजार किया जा रहा था, वह अब जल्द ही हकीकत में बदल जाएगा।
हालांकि, परियोजना की समय सीमा को लेकर अभी भी कुछ अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, खासकर मानसून और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण। लेकिन जिस तरह से वर्तमान में निर्माण कार्य में तेजी आई है, उससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन और निर्माण एजेंसियां इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने में जुटी हैं।
मनिहारी–साहिबगंज गंगा ब्रिज के निर्माण से न केवल दो राज्यों के बीच दूरी कम होगी, बल्कि यह पूरे पूर्वी भारत के लिए विकास की नई राह खोलेगा। आने वाले वर्षों में यह पुल क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल, सभी की निगाहें इस परियोजना की प्रगति पर टिकी हुई हैं और लोग उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब यह पुल पूरी तरह बनकर तैयार होगा और आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

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