सदर अस्पताल में सिस्टम फेल: लेबर ओटी में गर्मी से दो महिला डॉक्टर और एक कर्मी बेहोशकटिहार के मातृ शिशु अस्पताल में एसी ठप, पांच माह पुरानी चोरी के बाद नहीं हुई मरम्मत; मरीजों और नवजातों की सुरक्षा पर उठे सवाल

कटिहार, संवाददाता (मनोज कुमार):
कटिहार के सदर अस्पताल स्थित मातृ शिशु अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हो गई, जब भीषण गर्मी और उमस के बीच लेबर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में कार्य कर रही दो महिला डॉक्टर और एक स्वास्थ्यकर्मी अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। यह घटना अलग-अलग समय पर हुई, लेकिन कारण एक ही था—ओटी में एयर कंडीशनिंग सिस्टम का पूरी तरह फेल हो जाना। बंद वातावरण और बढ़ते तापमान के कारण हालात इतने खराब हो गए कि वहां मौजूद चिकित्साकर्मियों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया था।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। तत्काल अन्य कर्मियों ने बेहोश पड़े डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मी को बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया। हालांकि कुछ देर बाद सभी की हालत सामान्य हो गई, लेकिन इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली और तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, जिस मातृ शिशु अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस “वीआईपी भवन” के रूप में तैयार किया गया था, वहां करोड़ों रुपये की लागत से सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम लगाया गया था। लेकिन आज यह सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा है और केवल शोपीस बनकर रह गया है।
बताया जाता है कि करीब पांच महीने पहले अस्पताल के एसी प्लांट से चोरों ने कॉपर वायर और पाइप उखाड़ लिए थे। उस समय सर्दी का मौसम होने के कारण अस्पताल प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन, समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई और अब जब तापमान लगातार बढ़ रहा है, तो इसका सीधा असर अस्पताल की सेवाओं पर पड़ रहा है।
मातृ शिशु अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में, जहां प्रसूताओं और नवजात शिशुओं का इलाज होता है, वहां इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है। लेबर ओटी एक पूरी तरह बंद कमरा होता है, जहां ऑपरेशन के दौरान तापमान और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। ऐसे में कूलिंग सिस्टम का फेल होना न केवल डॉक्टरों और स्टाफ के लिए खतरा है, बल्कि मरीजों की जान के लिए भी जोखिम पैदा करता है।
घटना के समय ओटी के अंदर गर्मी इतनी अधिक थी कि चिकित्साकर्मियों को लगातार पसीना आ रहा था और ऑक्सीजन का स्तर भी प्रभावित हो रहा था। डॉक्टरों के बेहोश होने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि वर्तमान स्थिति में यहां ऑपरेशन करना कितना जोखिम भरा है।
अस्पताल के अन्य वार्डों और ओपीडी की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं है। वहां भी एसी सिस्टम लंबे समय से खराब पड़ा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर गर्मी के इस मौसम में अस्पताल का वातावरण असहनीय हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। यदि समय रहते एसी सिस्टम की मरम्मत कराई जाती या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती, तो आज यह नौबत नहीं आती।
इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि पुराने सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम की मरम्मत में काफी खर्च आएगा, जिसके लिए मुख्यालय को पत्र लिखकर बजट की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही बजट की स्वीकृति मिलेगी, मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि फिलहाल स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्टैंड-अलोन एसी लगाने का निर्देश दिया गया है, ताकि मरीजों और स्टाफ को कुछ राहत मिल सके।
हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब पांच महीने पहले ही एसी सिस्टम से जुड़ी चोरी की घटना हो चुकी थी, तब प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा था?
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में इस तरह की तकनीकी सुविधाएं केवल सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यकता होती हैं। खासकर लेबर रूम और ओटी जैसे स्थानों पर तापमान नियंत्रण अत्यंत जरूरी होता है। यहां किसी भी तरह की लापरवाही सीधे मरीजों के जीवन को खतरे में डाल सकती है।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वे जल्द से जल्द व्यवस्था को दुरुस्त करें। वहीं, आम जनता भी इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है।
कटिहार के इस मातृ शिशु अस्पताल में हुई यह घटना केवल एक लापरवाही का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करती है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में इससे भी बड़ी घटनाएं सामने आ सकती हैं।
फिलहाल, अस्पताल प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थायी समाधान कब तक निकल पाता है और मरीजों को बेहतर सुविधाएं कब तक उपलब्ध हो पाती हैं।
