राजेंद्र स्टेडियम में आदिवासी संस्कृति का महापर्व,संथाली भाषा विजय दिवस सह सोहराय मिलन समारोह में उमड़ा जनसैलाब


रिपोर्ट : मनोज कुमार साह, कटिहार ब्यूरो

कटिहार। शहर के राजेंद्र स्टेडियम में मंगलवार की संध्या आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपरा का भव्य संगम देखने को मिला। संथाली भाषा विजय दिवस सह सोहराय मिलन समारोह के अवसर पर आदिवासी समाज के लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, लोकगीतों और नृत्यों के बीच पूरा स्टेडियम आदिवासी संस्कृति के जीवंत रंग में रंगा नजर आया।

समारोह में वक्ताओं ने संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के संघर्ष को याद करते हुए इसे आदिवासी समाज की ऐतिहासिक जीत बताया। मुख्य वक्ता मनोज मुर्मू ने कहा कि संथाली भाषा हमारी पहचान है और हमारी संस्कृति की आत्मा भी। यह केवल भाषा की जीत नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और एकजुटता की विजय है।

कार्यक्रम के दौरान सोहराय पर्व की परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक नृत्य और गीतों ने वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया। वक्ताओं ने आदिवासी समाज की एकता, सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों तक भाषा-परंपरा को पहुंचाने पर जोर दिया।

समारोह के अंत में समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर कार्यकर्ताओं का उत्साह दोगुना हो गया। आयोजकों ने कहा कि यह आयोजन न केवल आदिवासी समाज की एकता और गौरव का प्रतीक है, बल्कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

 

कुल मिलाकर, राजेंद्र स्टेडियम में आयोजित यह समारोह आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और गौरव का जीवंत प्रदर्शन साबित हुआ, जिसने कटिहार को आदिवासी सांस्कृतिक चेतना के उत्सव का साक्षी बना दिया।

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