रायपुर में नक्सलविरोधी अभियानों की समीक्षा,31 मार्च से पहले नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का लक्ष्य

रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों को लेकर एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य राज्य में नक्सलविरोधी अभियानों की प्रगति की समीक्षा करना और आगे की रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में अपनाई गई सिक्योरिटी सेंट्रिक स्ट्रेटजी, बुनियादी ढांचे के विस्तार, नक्सलियों के वित्तीय नेटवर्क पर सटीक प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन ठोस प्रयासों के चलते नक्सल गतिविधियों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। अधिकारियों ने भरोसा जताया कि 31 मार्च से पहले नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा सुनिश्चित किया जा सकता है।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन और एरिया डॉमिनेशन अभियान से नक्सलियों का दायरा सिमटता जा रहा है। जिन इलाकों को कभी नक्सल प्रभावित माना जाता था, वहां अब प्रशासनिक पहुंच बढ़ी है और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षाबलों की सक्रियता और बेहतर खुफिया तंत्र के कारण नक्सलियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नक्सल उन्मूलन की रणनीति का अहम हिस्सा बताया गया। सड़क, पुल, मोबाइल टावर, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से दूर-दराज और जंगल क्षेत्रों में सरकार की उपस्थिति मजबूत हुई है। इससे न केवल सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान हुई है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली है। अधिकारियों ने कहा कि विकास कार्यों ने नक्सलियों की पकड़ कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
नक्सलियों के फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार को लेकर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि अवैध वसूली, खनन से जुड़ी गैरकानूनी आय और हवाला जैसे माध्यमों से मिलने वाले धन पर प्रभावी रोक लगाई गई है। कई मामलों में संपत्तियों की कुर्की और बैंक खातों की जांच से नक्सल संगठनों की आर्थिक रीढ़ तोड़ी गई है। अधिकारियों का कहना है कि धन की कमी से नक्सली संगठनों की संचालन क्षमता काफी हद तक कमजोर हुई है।
बैठक में आत्मसमर्पण नीति की सफलता को भी रेखांकित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति के तहत बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षा, रोजगार, प्रशिक्षण और सम्मानजनक जीवन का अवसर दिया जा रहा है। इससे न केवल नक्सल संगठनों की संख्या घटी है, बल्कि अन्य नक्सलियों को भी हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरणा मिली है।
समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जन संवाद और विश्वास बहाली पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा बल स्थानीय ग्रामीणों से नियमित संवाद कर रहे हैं। विकास योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे लोगों का भरोसा शासन-प्रशासन पर बढ़ा है और नक्सलियों के प्रति समर्थन में लगातार कमी आई है।
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। शेष बचे नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती और ऑपरेशन को और अधिक तेज किया जा रहा है। साथ ही, सीमावर्ती राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाकर संयुक्त अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि नक्सलियों को किसी भी तरह का सुरक्षित ठिकाना न मिल सके।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के उन्मूलन के बाद भी क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता होगी। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष फोकस किया जाएगा, ताकि भविष्य में नक्सल विचारधारा को दोबारा पनपने का मौका न मिले।
बैठक के अंत में यह दोहराया गया कि नक्सलवाद केवल सुरक्षा की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी रही है। लेकिन अब समन्वित रणनीति, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनता के सहयोग से यह चुनौती लगभग समाप्ति की ओर है। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
रायपुर में हुई यह समीक्षा बैठक नक्सलविरोधी अभियानों की दिशा और दशा दोनों को स्पष्ट करती है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के साझा प्रयासों से छत्तीसगढ़ अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां शांति, विकास और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का रास्ता प्रशस्त हो रहा है।
