जमुई में ‘माटी का बल’ दंगल प्रतियोगिता की तैयारियां जोरों पर, डीएम नवीन ने लिया जायजा
दो दिवसीय राज्य स्तरीय कुश्ती मुकाबले में भाग लेंगे बिहार के 300 पहलवान

जमुई, 13 फरवरी 2026 — बिहार की पारंपरिक खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने और ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से जमुई जिला मुख्यालय स्थित श्री कृष्ण सिंह स्टेडियम में 14 एवं 15 फरवरी 2026 को आयोजित होने जा रहे राज्य स्तरीय ‘माटी का बल’ दंगल प्रतियोगिता की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस प्रतियोगिता का आयोजन बिहार राज्य खेल प्राधिकरण एवं बिहार राज्य कुश्ती संघ के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है।
इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में बिहार के विभिन्न जिलों से लगभग 300 पहलवान भाग लेने जा रहे हैं, जिससे यह आयोजन राज्य स्तर पर कुश्ती प्रतिभाओं का एक बड़ा संगम बनने जा रहा है।
डीएम नवीन ने लिया तैयारियों का जायजा
प्रतियोगिता की तैयारियों का निरीक्षण करने के लिए जिला पदाधिकारी श्री नवीन स्वयं श्री कृष्ण सिंह स्टेडियम पहुंचे और वहां चल रही व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उनके साथ पुलिस अधीक्षक, अपर समाहर्ता, उप विकास आयुक्त, जिला परिवहन पदाधिकारी, खेल पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
डीएम ने आयोजन स्थल पर सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल, दर्शक दीर्घा, खिलाड़ियों के ठहराव एवं यातायात व्यवस्था सहित सभी बिंदुओं की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए तथा खिलाड़ियों और दर्शकों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
पारंपरिक तरीके से तैयार हो रहा अखाड़ा
दंगल प्रतियोगिता की सबसे खास बात इसका पारंपरिक अखाड़ा है, जिसकी तैयारी इन दिनों जोर-शोर से चल रही है। स्थानीय ग्रामीणों और खेल प्रेमियों की बड़ी संख्या अखाड़े की तैयारी में जुटी हुई है।
अखाड़े की मिट्टी को विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है, जिसमें पारंपरिक पद्धति के अनुसार दूध, दही, नींबू, हल्दी, देसी घी एवं कड़वा तेल का मिश्रण डाला जा रहा है। यह प्रक्रिया मिट्टी को मुलायम, स्वच्छ और पहलवानों के लिए सुरक्षित बनाने हेतु अपनाई जाती है।
स्थानीय बुजुर्गों और पारंपरिक अखाड़ा विशेषज्ञों की देखरेख में तैयार हो रहा यह दंगल मैदान न केवल प्रतियोगिता का केंद्र होगा, बल्कि पारंपरिक भारतीय कुश्ती संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करेगा।
स्थानीय लोगों में उत्साह
इस आयोजन को लेकर जमुई सहित आसपास के क्षेत्रों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। अखाड़े की तैयारी देखने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के आयोजन से न केवल पारंपरिक खेलों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं को नशा और भटकाव से दूर रहने की प्रेरणा भी मिलेगी।
खिलाड़ियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पहलवानों के लिए ठहरने, भोजन, चिकित्सा सहायता और अभ्यास की समुचित व्यवस्था की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खिलाड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इसके अलावा प्रतियोगिता के दौरान एंबुलेंस, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और सुरक्षा व्यवस्था भी तैनात रहेगी।
सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था
पुलिस अधीक्षक ने प्रतियोगिता के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। भीड़ नियंत्रण, वाहन पार्किंग और यातायात संचालन के लिए विशेष पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।
पारंपरिक खेलों को मिलेगा बढ़ावा
डीएम नवीन ने कहा कि ‘माटी का बल’ जैसे आयोजन ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों को संरक्षित करना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रतियोगिता आने वाले समय में राज्य स्तरीय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाएगी।
खेल संस्कृति को मिलेगा नया मंच
इस दंगल प्रतियोगिता के माध्यम से युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। साथ ही यह आयोजन ग्रामीण खेल संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जमुई में आयोजित होने जा रहा यह दो दिवसीय दंगल न केवल खेल प्रतियोगिता है, बल्कि यह पारंपरिक भारतीय खेल विरासत का उत्सव भी है।
इस आयोजन से बिहार में कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है और युवा पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रेरित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
