जगदीशपुर हटिया में अवैध वसूली का आरोप, अंचल कार्यालय की भूमिका पर उठे सवाल

भागलपुर जिले के जगदीशपुर अंचल क्षेत्र स्थित साप्ताहिक हटिया बाजार इन दिनों अवैध वसूली के आरोपों को लेकर चर्चा में है। स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकारी हटिया होने के बावजूद यहां गैर-सरकारी व्यक्तियों द्वारा मनमाने ढंग से लगान की वसूली की जा रही है। इस कथित अवैध वसूली से छोटे दुकानदारों और गरीब व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जिससे उनमें भारी नाराजगी और आक्रोश देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, जगदीशपुर हटिया में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को साप्ताहिक हाट लगता है, जहां आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में दुकानदार अपनी दुकानें लगाने आते हैं। इन दुकानदारों से ₹50 से लेकर ₹400 तक की राशि वसूली जाती है। हैरानी की बात यह है कि इस वसूली के बदले किसी प्रकार की आधिकारिक रसीद या कूपन नहीं दिया जाता, जिससे यह पूरी प्रक्रिया संदिग्ध और अवैध प्रतीत होती है।
स्थानीय दुकानदार राकेश कुमार ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “जब यह सरकारी हटिया है, तो हमसे लिए जा रहे पैसे की रसीद क्यों नहीं दी जाती? अगर यह सरकारी लगान है तो उसका कोई प्रमाण होना चाहिए। लेकिन यहां पैसे देने के बाद भी हमें कोई कागज नहीं मिलता। उल्टा अगर हम सवाल करते हैं तो हमें धमकाया जाता है कि अगर हटिया में दुकान लगानी है तो चुपचाप पैसे दो, नहीं तो यहां से हट जाओ।”
इसी तरह एक अन्य दुकानदार राहुल ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत अंचलाधिकारी से करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। राहुल के अनुसार, “जब हम अंचल कार्यालय पहुंचे और शिकायत की, तो हमें डांट-फटकार कर भगा दिया गया। इससे साफ लगता है कि हमारी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।”
ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध वसूली में अंचल कार्यालय के कुछ कर्मियों की मिलीभगत हो सकती है। खासतौर पर अंचल के नाजीर और कुछ अन्य लोगों का नाम सामने आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 7 से 8 लोगों का एक समूह मिलकर दुकानदारों पर दबाव बनाता है और उनसे पैसे वसूलता है। यह समूह हटिया में घूम-घूमकर दुकानदारों से वसूली करता है और विरोध करने वालों को डराने-धमकाने का भी काम करता है।
दुकानदारों का कहना है कि वे मजबूरी में यह रकम देने को विवश हैं, क्योंकि अगर वे पैसे नहीं देते हैं तो उन्हें हटिया में दुकान लगाने से रोक दिया जाता है। कई दुकानदारों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वे डर के कारण खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर इस व्यवस्था से बेहद परेशान हैं।
इस मामले में जब अंचलाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन “नॉट रीचेबल” बताया गया। इससे प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी उपलब्ध नहीं रहेंगे और शिकायतों पर ध्यान नहीं देंगे, तो इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना मुश्किल हो जाएगा।
जगदीशपुर हटिया से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सरकारी हटिया में इस तरह की अवैध वसूली हो रही है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह गरीब और छोटे व्यापारियों के अधिकारों का भी हनन है। इस प्रकार की गतिविधियां स्थानीय प्रशासन की छवि को भी प्रभावित करती हैं और लोगों का भरोसा कम करती हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन को इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच करनी चाहिए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हटिया में वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हो।
ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि हटिया में लगान वसूली के लिए अधिकृत कर्मियों की पहचान स्पष्ट की जाए और हर भुगतान के बदले दुकानदारों को रसीद या कूपन दिया जाए। इसके अलावा, हटिया में एक सूचना बोर्ड भी लगाया जाना चाहिए, जिसमें वसूली की निर्धारित दरों का उल्लेख हो, ताकि किसी भी प्रकार की मनमानी या ठगी की संभावना समाप्त हो सके।
यह मामला केवल आर्थिक शोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे लोगों का भरोसा शासन-प्रशासन से उठ सकता है और भविष्य में इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, जिस तरह से स्थानीय स्तर पर विरोध और आक्रोश बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि जिला प्रशासन जल्द ही इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
जगदीशपुर हटिया के दुकानदारों और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। वे चाहते हैं कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें इस अवैध वसूली से राहत दिलाई जाए, ताकि वे बिना किसी भय और दबाव के अपना व्यवसाय कर सकें।
