लोक अदालत का मूल मंत्र ‘न कोई जीते-न कोई हारे’: कटिहार में 1872 मामलों का निष्पादन, फरियादियों को मिला त्वरित न्याय


संवाददाता : मनोज कुमार, कटिहार
कटिहार जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के लंबित मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर त्वरित निष्पादन किया गया। लोक अदालत में पहुंचे फरियादियों के चेहरों पर राहत साफ नजर आई। न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में सैकड़ों लोगों को वर्षों पुराने विवादों से मुक्ति मिली।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना के निर्देश पर आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत की शुरुआत सुबह 10 बजे जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। उद्घाटन समारोह में जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी, पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी, एडीजे, सीजेएम, एसडीजेएम, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष-सचिव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और न्यायिक कर्मी उपस्थित रहे।
लोक अदालत में सुनवाई के लिए कुल 12 बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों में दीवानी मामले, फौजदारी के शमनीय वाद, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस, बिजली बिल, जल कर, टेलीफोन बिल, मनरेगा मजदूरी तथा भू-विवाद से संबंधित प्री-लिटिगेशन मामलों की सुनवाई की गई। सभी पक्षकारों को पूर्व में नोटिस भेजकर बुलाया गया था ताकि अधिक से अधिक मामलों का समाधान किया जा सके।
इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत का मूल मंत्र “न कोई जीते, न कोई हारे” है। यहां दोनों पक्षों की सहमति से विवाद समाप्त होता है, जिससे समय, पैसा और रिश्ते तीनों बचते हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में पारित अवार्ड को सिविल कोर्ट की डिक्री का दर्जा प्राप्त होता है और इसके खिलाफ किसी प्रकार की अपील नहीं की जा सकती।
जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि छोटे-छोटे विवादों को लेकर वर्षों तक कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाने से आम लोगों का समय और संसाधन दोनों बर्बाद होते हैं। लोक अदालत जैसे मंच से त्वरित न्याय मिलने से लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत होता है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आगामी लोक अदालतों के लिए और अधिक सक्रियता से कार्य करने का निर्देश दिया।
पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी ने कहा कि कई आपराधिक मामले मामूली विवाद से शुरू होते हैं। यदि थाने स्तर पर ही काउंसलिंग और आपसी सुलह को बढ़ावा दिया जाए तो कई मामलों को एफआईआर और कोर्ट तक पहुंचने से रोका जा सकता है। उन्होंने सभी थानाध्यक्षों को लोक अदालत की भावना के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया।
लोक अदालत में पहुंचे कई फरियादियों ने वर्षों पुराने विवाद समाप्त होने पर खुशी जताई। मनिहारी निवासी 65 वर्षीय रामप्रवेश यादव ने बताया कि उनका आठ वर्ष पुराना जमीन विवाद आज समझौते के साथ समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि बेटे की शादी के लिए पैसे की जरूरत थी, लेकिन जमीन विवाद के कारण परेशानी बनी हुई थी। अब समझौता हो जाने से राहत मिली है। वहीं दहेज उत्पीड़न मामले में समझौता होने के बाद एक महिला पक्षकार ने कहा कि अब वह अपने पति के साथ फिर से नई जिंदगी शुरू करेंगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने बताया कि देर शाम तक चली इस लोक अदालत में कुल 1,872 मामलों का निष्पादन किया गया। विभिन्न मामलों में कुल 4 करोड़ 36 लाख रुपये की सेटलमेंट राशि पर सहमति बनी। बैंक ऋण वसूली के 312 मामलों में 1.82 करोड़ रुपये, बिजली बिल के 540 मामलों में 62 लाख रुपये तथा मोटर दुर्घटना दावा के 28 मामलों में 95 लाख रुपये के समझौते हुए।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे अपने मुवक्किलों को लोक अदालत का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें, ताकि अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान हो सके। उन्होंने बताया कि अगली राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम के अंत में न्यायिक पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों तथा पैरालीगल वालंटियर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कटिहार में आयोजित यह राष्ट्रीय लोक अदालत न केवल त्वरित न्याय का उदाहरण बनी, बल्कि समाज में आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण समाधान की मजबूत मिसाल भी पेश कर गई।

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